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ऊखीमठ: 12 सितम्बर  2015
उत्तराखंड में ऊखीमठ में बादल फटने से आई तबाही को तीन साल हो गए पर आपदा पीड़ितों की जिंदगी आज भी वैसी ही बदहाल बनी हुई है। ऊखीमठ त्रासदी के आपदा पीड़ित आज भी टीन शेड में रहने को मजबूर हैं। राज्य सरकार ने इन्हें मकान निर्माण के लिए मात्र एक लाख रुपये की रकम दी थी, जिससे यह अपनी छत तैयार नहीं कर सके।

केंद्र सरकार ने मृतक आश्रितों के लिए दो लाख रुपये की सहायता घोषित थी, लेकिन कई प्रभावित परिवारों को तीन साल गुजर जाने पर भी यह धनराशि नहीं मिल पाई है।

13/14 सितंबर 2012 की मध्यरात्रि को ऊखीमठ में बादल फटने से चुन्नी मंगोली, ब्राह्मणखोली, प्रेमनगर, किमाणा, डुंगर सेमला और गिरिया गांव के 62 लोग काल के ग्रास बने थे। आपदा में 51 आवासीय मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे।
Courtesy: अमर उजाला



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