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देहरादून: 11 अक्टूबर , 2015

देहरादून: वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही उत्तराखंड भाजपा में इन दिनों सांगठनिक चुनाव की कसरत चल रही है। इस बार चुनाव में भाजपा के प्रदेश संगठन में न सिर्फ बड़ा फेरबदल होना तय है, बल्कि किसी कद्दावर चेहरे और मजबूत नेतृत्व क्षमता वाले नेता को ही संगठन की कमान सौंपे जाने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों में से भी किसी एक को उत्तराखंड भाजपा का नया कप्तान बनाया जा सकता है। 
 लोकसभा चुनाव 2014 में उत्तराखंड की पांचों संसदीय सीटें जीतने के बाद भाजपा की निगाहें अब वर्ष 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव पर टिकी हैं। इस चुनाव में भाजपा को उत्तराखंड में अपने पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस पार्टी से दो-दो हाथ करने होंगे, मगर खास बात यह है कि 2017 के चुनावी समर में प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस पार्टी की कमान अनुभवी राजनेता व चुनावी रणनीति के माहिर मुख्यमंत्री हरीश रावत के हाथ में होगी। यही वजह है कि भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी अपने किसी दिग्गज व मजबूत नेतृत्व क्षमता वाले नेता को सौंप सकता है।
सूत्रों की मानें तो पार्टी हाईकमान के इस रुख के पीछे मौजूदा प्रदेश भाजपा संगठन की निष्क्रियता भी एक वजह है। दरअसल, विपक्षी दल भाजपा के पास पिछले एक-दो वर्षो में राज्य की कांग्रेस सरकार को घेरने के लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दे रहे। आपदा राहत में गड़बड़ी से लेकर खनन, शराब व आबकारी स्टिंग जैसे प्रकरण इसमें शामिल हैं, मगर विपक्ष भाजपा इन गंभीर मुद्दों पर भी कांग्रेस की सरकार को पूरी तरह घेरने में नाकाम साबित हुई। पिछले दिनों पेट्रोल पर वैट का बेस प्राइस तय करने व रजिस्ट्री शुल्क बढ़ाने के मुद्दे पर भी विपक्ष लगभग शांत ही नजर आया। <
अलबत्ता, विपक्ष के विधायकों की उपेक्षा व उत्पीड़न के मामले में जरूर भाजपा ने मुख्यमंत्री आवास कूच के जरिए सरकार पर खासा दबाव बनाया। चूंकि 2017 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अब भाजपा हाईकमान कांग्रेस के विरुद्ध आक्रामक तेवर अपनाने के मूड में है, लिहाजा पार्टी हाईकमान प्रदेश संगठन की कमान अपने ऐसे ही किसी कद्दावर व तेजतर्रार नेता के हाथों में सौंप सकता है। इस लिहाजा से तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों भुवन चंद्र खंडूड़ी, भगत सिंह कोश्यारी या रमेश पोखरियाल निशंक में से किसी एक को उत्तराखंड में पार्टी की कमान सौंपे जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस बारे में नवंबर तक तस्वीर साफ हो जाएगी। 
Courtesy: जागरण


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