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देहरादून : 05 नवंबर  , 2015

राजीव गांधी नवोदय विद्यालय में राज्य स्तरीय कला उत्सव का राज्य के 16 वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में केक काटकर शानदार आगाज हुआ। प्रदेश भर से पहुंचे प्रतिभागियों ने रणसिंघा, ढोल, दमाऊ पर लोक नृत्यों के जरिये गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी लोक संस्कृति की छटा बिखेरी।

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत लोक कलाओं के संरक्षण एवं इसे बढ़ावा दिए जाने को लेकर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ थीम पर आयोजित प्रतियोगिता का शिक्षा महानिदेशक डी सेंथिल पांडियन ने केक काटकर शुभारंभ किया। उन्होंने अमर उजाला की पहल पर प्रदेश भर में मनाए जा रहे राज्य स्थापना उदय उत्सव को सराहा।

वहीं, बालिका शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों की यह प्रतियोगिताएं राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित हो रही हैं, राज्य स्तर पर चयनित टीमें इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग करेंगी। लोक नृत्य, गीत, थियेटर और दृश्य कलाएं चार वर्गों में आयोजित इस प्रतियोगिता का उद्देश्य बच्चों के भीतर कलाओं के प्रति रुचि जगाना एवं प्रतिभाओं को आगे लाना है।

समारोह में शिक्षा निदेशक माध्यमिक शिक्षा आरके कुंवर, शिक्षा निदेशक बेसिक शिक्षा सीमा जौनसारी, संयुक्त परियोजना निदेशक शशि चौधरी, अपर निदेशक महावीर बिष्ट, अपर निदेशक एससीईआरटी गीता नौटियाल, एचओडी सीमेट आशा पैन्युली, राजकीय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष राम सिंह चौहान, प्रांतीय महामंत्री सोहन सिंह माजिला, प्रधानाचार्य आरपी बमोला, दिनेश चंद्र भट्ट आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन मोहन सिंह बिष्ट ने किया। प्रतियोगिता के निर्णायकों में कल्पना बहुगुणा, माधुरी बड़थ्वाल, अजीत सिंह रावत, नरेंद्र शर्मा, वाहिनी देवी, डा.नंद किशोर हटवाल, अनुपमा सिंह, सतीश धौलाखंडी, सावित्री काला, कैलाश ध्यानी, राजकुमार भारती शामिल रहे।

ठंडो रे ठंडो मेरे पहाड़ की हवा ठंडी...



राज्य स्तरीय उत्सव में सदाबहार गीत ठंडो रे ठंडो मेरे पहाड़ की हवा ठंडी पाणी ठंडो, उत्तरकाशी के तांदी नृत्य एवं देवी देवताओं का आह्वान करते जागरों की प्रस्तुति ने पहाड़ी लोक परंपराओं को प्रस्तुत किया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत महासू देवता की डोली यात्रा, तांदी नृत्य आदि नृत्यों की सामूहिक प्रस्तुति से हुई। इसके बाद बच्चों ने पर्यावरण का संदेश देते ठंडो रे ठंडो मेरा पहाड़े की हवा, चांचरी झमैका अल्मोड़ा की नंदा देवी मार झमैका, देवी देवताओं का आह्वान करते जागर, देवी स्तुति नारैणी मेरी माता भवानी की प्रस्तुति को खूब सराहा गया।

वहीं प्रदेश के विभिन्न जनपदों से पहुंचे बच्चों ने कन्या भ्रूण हत्या पर नृत्य नाटिका की प्रस्तुति दी। नृत्य नाटिका के जरिये बच्चों ने दर्शाया कि बेटे की चाह में किस तरह से भ्रूण हत्या हो रही है। प्रतिभागियों ने कहा कि बेटियों को पहले बचाना है फिर पढ़ाना है। कार्यक्रम में सीएन काला, राकेश काला आदि मौजूद रहे। 

रिगांल से बनाया न्याय के देवता का मंदिर

राज्य स्तरीय कला उत्सव में राजकीय इंटर कालेज सलानी बागेश्वर की छात्रा गुडिया व निर्मला दोसाद ने पारंपरिक ऐपण कला को प्रदर्शित किया। वही रिंगाल से न्याय के देवता चितई गोलू व अपना विद्यालय बनाया। स्कूल के शिक्षक डा.हरीश दफोटी ने कहा कि बालिकाओं ने काष्ट से खोली और ऐपण से लक्ष्मी, सरस्वती व पार्वती बनाए भी बनाए हैं।

Courtesy: अमर उजाला


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