.

.









टिहरी : 17 नवंबर  , 2015
विहिप के अशोक सिंघल की यादें उत्तराखंड की पुरानी टिहरी से भी जुड़ी हैं। 90 के दशक में जब टिहरी बांध के विरोध में आंदोलन चरम पर था, तो उन्होंने टिहरी पहुंचकर बांध विरोधी आंदोलन को समर्थन दिया था। गंगोत्री-यमुनोत्री की यात्रा के दौरान वह कई बार चंबा में भी रुके।

विहिप के संरक्षक रहे अशोक सिंघल का मंगलवार को गुड़गांव में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। हिंदूवादी नेता रहे स्व. सिंघल का नाता पुरानी टिहरी से भी रहा है। अप्रैल 1998 में उन्होंने टिहरी पहुंचकर बांध विरोधी आंदोलन को समर्थन दिया था।

साथ ही उन्होंने आजाद मैदान में एक सभा को संबोधित कर बड़े बांधों का विरोध कर गंगा की अविरलता की पैरवी की थी। उन्होंने पुल के पास गंगा कुटीर पर पहुंच कर बांध का विरोध कर रहे पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा को भी समर्थन दिया। उस दौरान चंबा के लोग बांध के समर्थन में थे, जिससे वह बांध विरोधियों का विरोध कर रहे थे।

विरोध को देखते हुए अशोक सिंघल को खाड़ी से वाया देवप्रयाग होकर पुरानी टिहरी पहुंचना पड़ा। विहिप नेता राजेंद्र अग्रवाल और तिलकराम चमोली कहते हैं कि उन्होंने बांध विरोधी आंदोलन को नई ताकत दी थी। वर्ष 2005-06 में गंगोत्री-यमुनोत्री की यात्रा के दौरान वह तत्कालीन विहिप महामंत्री प्रवीन तोगड़िया के साथ कई बार चंबा में कार्यकर्ताओं से मिलते रहे।

...जब भड़क गए थे सिंघल
बांध विरोधी आंदोलन को समर्थन देने टिहरी पहुंचे सिंघल सभा करने के बाद पत्रकार वार्ता कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि टिहरी बांध को बंद नहीं किया गया, तो वह 1000 संतों के साथ बांध स्थल कूच करेंगे।

यह कहने पर एक पत्रकार ने यह कह दिया था कि सिंघल जी आपके साथ एक भी संत नहीं दिख रहे हैं, आप हजार संतों की बात कर रहे हैं। तो वे प्रश्न कर रहे पत्रकार पर भड़क उठे। कार्यकर्ताओं ने किसी तरह मामला शांत कराया।
Courtesy: अमर उजाला


See More

 
Top