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देहरादून : 27 नवंबर  , 2015
वैष्णो देवी में दुर्घटनाग्रस्त हुए हेलिकॉप्टर में यूं तो कई लोगों की जान चली गई। लेकिन कटरा हादसे ने उत्तराखंड की हीरो पायलट सुमिता विजयन की भी जान ले ली। 45 वर्षीय सुमिता विजयन ही इस हेलिकॉप्टर को उड़ा रही थीं। सुमिता विजयन को उत्तराखंड की आपदा में बचाव कार्य को बेहतरीन ढंग से अंजाम देने के लिए जाना जाता है। सोमवार को हुए हेलिकॉप्टर हादसे में सुमिता समेत सात लोगों की जान चली गई थी।

सुमिता को याद करते हुए उनके सहकर्मी और फ्रेंड्स कहते हैं कि जब 2013 में उत्तराखंड में आपदा आई थी तो नेहरु इंस्टिट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग के दल को छोड़कर बचाव कार्य में लगने वाली सुमिता विजयन पहली पायलट थीं। उस वक्त बचाव कार्य को तेजी से शुरू किए जाने की जरूरत थी। एनआईएम के प्रिंसिपल कर्नल अजय कोठियाल ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'वह सुमिता ही थीं, जिन्होंने आपदा के तत्काल बाद हमारी टीम से ड्रॉप करने का फैसला लिया है। उस परिस्थिति में सुमिता ने जिस तरह से बचाव काम को अंजाम दिया, वह काफी चुनौतीपूर्ण है।'

वैष्णो देवी की आपदा में जान गंवाने वाली सुमिता ने बिना हैलीपैड के ही उत्तराखंड आपदा के दौरान हैलिकॉप्टर उड़ाने का काम किया था। कोई अनुभवी पायलट ही इस तरह से विमान उड़ा सकता है। हम सेना में इस एटिट्यूड को 'बियॉन्ड द कॉल ऑफ ड्यूटी' कहा जाता है। सुमिता विजयन इंडियन एयर फोर्स के पहले महिला पायलट जत्थे में शामिल थीं। उस टीम में वह 8,000 मिनट का उड़ान के अनुभव के साथ सबसे अनुभवी पायलटों में से एक थीं।

वह 1997 में आईएएफ के लिए चुनी गई थीं। शॉर्ट सर्विस कमिशन के लिए चुनी गईं सुमिता विजयन 2005 में रिटायर हुई थीं। इसके बाद उन्होंने चीफ पायलट के तौर पर हेली सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को जॉइन किया था।नवभारत टाइम्स


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