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श्रीनगर : 17 नवंबर  , 2015
रमन मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने केन्द्रीय मंत्री उमा भारती द्वारा गंगा के उद्गम स्थल का पता लगाने की बात को विदेशी चाल बताया। कहा कि गंगा के उद्गम स्थल को ढूढ़ने की बात भारतीय संस्कृति, ज्ञान, परम्परा व सत्य के विपरीत है। गंगा तो ग्लेशियर से बढ़कर गोमुख और तोपवन से आई है। जो शोध की बात की जा रही है वह एक विदेशी चाल है और भारती ज्ञान व सभ्यता पर शंका खड़ा करना है। मानसरोवर से गंगा का प्रवाह होना ये भौगोलिग दृष्टि से सिद्ध नहीं होता। एक विदेशी वैज्ञानिक ने कह दिया और हम इस पर रिचर्स करें यह एक बचकानी बात है।

श्रीनगर में बुधवार को जल पुरुष डॉ.राजेन्द्र सिंह ने कहा कि श्रीनगर में गंगा आईसीयू में भर्ती है जैसी दिख रही है। यहां एक प्रतिशत भी जल प्रवाह नहीं है। गंगा भारत में एक श्रेणी की नदी है और उसमें 62 प्रतिशत प्रवाह होना चाहिए। किंतु यहां श्रीनगर में नदी 1 प्रतिशत भी प्रवाह नहीं दे रही है। जो यह सिद्ध करता है कि भारत में गंगा के प्रति बनाये गये कानून नहीं माने जा रहे हैं।  केन्द्र सरकार नमामि गंगे और गंगा एक्शन प्लान जैसे कई कार्य कर रही है, लेकिन यहां गंगा आईसीयू में भर्ती है और मरने जा रही है, किंतु यहां के बेटों को चिंता नहीं है। डॉ. सिंह ने कहा कि रिवर में सीवर जब तक जायेगा गंगा स्वस्थ्य नहीं होगी। इसके लिए सरकारों को काम करने की जरूरत है। इस मौके पर अन्ना टीम के प्रदेश संयोजक भोपाल सिंह चौधरी भी मौजूद थे।

महिलाओं ने श्रीनगर में अलकनंदा की हालत बताई
प्रकृति पर्यावरण संस्थान के संरक्षक बीना चौधरी एवं अध्यक्ष अरुणा राणा ने डॉ. सिंह को नगर क्षेत्र में अलकनंदा नदी की सूखती जल धारा के बारे में जानकारी दी। साथ ही कहा कि नदी सूखती जा रही है और नगर क्षेत्र में गंदा पानी लोगों को पिलाया जा रहा है। महिलाओं ने जल पुरुष से समर्थन मांगा। जल पुरुष डॉ. सिंह ने कहा कि गंगा को मॉ कहने वाले बेटी-बेटियों को एकजुट कर इसमें आगे आना चाहिए और गंगा के लिए लड़ाई लड़नी होगी।Courtesy: हिन्दुस्तान


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