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देहरादून : 05 नवंबर  , 2015

गैरसैंण सत्र से उपजा स्थायी राजधानी का विवाद बृहस्पतिवार को और गहरा गया। भाजपा ने दो टूक कहा कि सत्ता में आते ही गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनायेंगे। इसके जवाब में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि कांग्रेस ने ही भाजपा को यह ऐलान करने के लिए मजबूर किया है।

भाजपा की मंशा साफ होती तो वह विधानसभा सत्र में गैरसैंण स्थायी राजधानी के मुद्दे पर नियम 310 के तहत विशेष चर्चा के बजाय सामान्य चर्चा के लिए तैयार हो जाती। कांग्रेस संगठन काम करके दिखाने के अपने पुराने रुख पर कायम रही।

बृहस्पतिवार को नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत ने भाजपा प्रदेश मुख्यालय पर आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में ऐलान किया कि भाजपा 2017 में सत्ता में आई तो गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित किया जाएगा।

राजधानी विवाद भाजपा की देन: सीएम


भाजपा नेताओं ने कहा कि सरकार नियम 310 के तहत मतदान होने के डर से गैरसैंण में तीन नवंबर को सदन में स्थायी राजधानी के मुद्दे पर चर्चा से पीछे हट गई। तीरथ ने कहा कि गैरसैंण स्थायी राजधानी होनी चाहिए यह हमारा स्पष्ट मत है। भाजपा ने तीन नवंबर को गैरसैंण सत्र के दौरान सदन में सरकार से उसका स्पष्ट मत पूछा था।

नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने कहा कि अब यह सरकार बताएगी कि 310 में विपक्ष कौन सा मुद्दा उठाए और कौन सा नहीं। गैरसैंण में एक नवंबर को कांग्रेस अधिवेशन में भी गैरसैंण पर एक शब्द नहीं बोला गया।

उधर, देर शाम सचिवालय में मीडिया से मुखातिब मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि राजधानी का विवाद भाजपा की ही देन है। 2000 में अंतरिम सरकार में रहते हुए भाजपा ने यह सवाल हल नहीं किया। 2007 से लेकर 2012 तक सत्ता में रहते हुए भाजपा ने गैरसैंण में एक भी काम नहीं किया। अब कांग्रेस ने गैरसैंण में विधानभवन बनाने से लेकर कैबिनेट और सत्र आयोजित किया तो भाजपा को गैरसैंण की याद आई।
Courtesy: अमर उजाला


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