.

.




यदि कार्य करने की इच्छा हो तो कोई भी काम आसान हो जाता है। इसी इच्छाशक्ति व कार्यकुशलता के बल पर विकासखण्ड गंगोलीहाट के दूरस्थ क्षेत्र मे स्थित राजकीय जूनियर हाईस्कूल रूगड़ी के शिक्षक श्री चन्द्रशेखर जोशी व उनके साथी श्री जगदीश चन्द्र न्योलिया ने इस विद्यालय को जैसे नया जीवन दे दिया हो। इस विद्यालय में श्री जोशी जी के आने से पूर्व लगभग 18 छात्र पढ़ते थे और आज यह छात्रसंख्या बढ़कर 34 तक हो गयी है। बढ़ी हुई छात्रासंख्या से सहज ही यह अनुमान लगाया जा सकता है कि इन शिक्षकों ने किस तरह वहां के लोगों का दिल जीतते हुए शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने हेतु अथक प्रयास किया है। 
सामुदायिक समभागिता का मैंने इससे सुन्दर उदाहरण कहीं नहीं देखा। मैं स्वयं वहां की एस0एम0सी0 अध्यक्षा तथा सदस्यों से मिला हूं तथा उनसे इस विद्यालय में शिक्षा की स्थिति व विद्यालय में उनके योगदान पर काफी देर वार्ता की है। उनका तो यह कहना था कि हम विद्यालय के लिए जितना संभव है करने को तैयार हैं। प्रमाण स्वरूप यह देखने में भी आया। शिक्षकों के इशारे पर कुछ ही देर में वहां गांव की कई महिलाएं इकठ्ठा हो जाती हैं तथा विद्यालय की समस्याओं को गिनाने लगती हैं। स्वच्छ भारत कोश के अन्तर्गत यहां एक शौचायल स्वीकृत हुआ। एस0एम0सी0 ने कार्य आरम्भ किया परन्तु तकनीकि खामियों के कारण काफी समय तक उस विद्यालय के खाते में धनराशि नहीं प्राप्त हो पायी परन्तु वहां की एस0एम0सी0 ने लगभग डेेढ़ लाख की लागत का यह निर्माण कार्य बिना धनराशि के ही पूर्ण कर दिया। यद्यपि काफी प्रयासों के बाद अब यह धनराशि विद्यालय को प्राप्त हो चुकी है। यहां की महिलाओं के सहयोग व विद्यालय के प्रति समर्पण भावना को सलाम है। कार्य की व्यस्तताओं के बावजूद भी जब उनको बुलाया जाता है तुरन्त उपस्थित हो जाती हैं। यह सब जो मैंने लिखा है इसे कोई भी इस जगह जाकर प्रत्यक्ष रूप में कभी भी प्रमाणित भी कर सकता है।
शिक्षा के साथ-साथ यहां के बच्चे अन्य सहगामी क्रियाकलापों में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। सपनों की उड़ान कार्यक्रम में विकासखण्ड स्तर पर न केवल यहां के छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया बल्कि वहां की महिलाओं ने विकासखण्ड स्तर पर बड़ा सुन्दर कार्यक्रम पेश किया। बनकोट महोत्सव में यहां के बच्चों ने सांस्कृतिक व अन्य प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान प्राप्त किया। समय-समय पर यहां बाल मेला, विज्ञान मेला, बेटी-बचाओ, बेटी-पढ़ाओ आदि कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं इनमें सबसे अच्छी बात यह है कि गांव के लोग बढ़-चढ़कर विशेष रूप से महिलाएं बड़े उत्साह से शामिल होती हैं। इस विद्यालय में किसी भी अवसर पर एकत्रित भीड़ को देखकर लगता है कि कोई बड़ा मेला जैसे लगा हो। 
इनके विद्यालय में विगत कई समय से दीवार पत्रिका भी निकल रही है यद्यपि अनियमित रूप से निकलती है। फिर भी बच्चे हमेशा कुछ न कुछ रचनात्मक कार्य करते रहते हैं। यह सब कुशल शिक्षकद्वय के कुशल मार्गनिर्देशन से संभव हो रहा है। मुझे आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि ये शिक्षक साथी आने वाले समय में इस विद्यालय को और उन्नति के शिखर पर ले जायेंगे। आभार : रमेश जोशी 


See More

 
Top