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देहरादून : 22 दिसंबर , 2015
10 वर्ष पूर्व आचार्य कृष्णानन्द नोटियाल जी निर्देशन में गुप्तकाशी उत्तराखण्ड से आये कलाकारों ने हमारी धरोहर चक्रव्यूह का मंचन प्रथम बार एन०सी०आर० क्षेत्र मेअंज्वाळ के तत्वावधान मे किया गया था उसके बाद दिल्ली हाट,इन्दरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र मे ओर अब इन्द्रपुरम में केवल दस वर्षों में हमारी संस्थाओं ने केवल चार बार इन्द्रपुरम शरदोउत्सव के दौरान अयोजन मंडल मे सक्रिय सदस्य होने पर जब संयोजक तथा अन्य सदस्यों के सामने प्रस्ताव रखा सभी ने सहर्ष स्वीकार किया ,डा०राकेश भट्ट जी से बात भी हो रही थीं पर दुर्भाग्य से जगह छोटी होने के कारण हम कर न सके मै उन मित्रो क| बहुत आभारी हुँ जिन्होंने महाकौथिग मे चक्रव्यूह अयोजन के लिए पक्ष रखा यह वह सच्चे संस्कृति प्रेमी हैं जिन्होंने दोनों कार्यक्रमो मे बड चढ़ कर हिस्सा लिया सभी संस्कृति प्रेमी भाइयों से ,संस्थाओं मेरा निवेदन है नाच गाने के कार्यक्रम तो बहुत हो जाते हैं हमारे पास चक्रव्यूह कमलव्यूह,रमण,सुमणी कु पंथ्या दादा,आदि अनेक इतिहासक धरोहर है इनको नई पीढ़ी तक ले जायेगे तभी हमारे कोथिग सफल कहलायेगे। Harish Khankriyal


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