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हरिद्वार : 22 जनवरी  , 2016


सोशल नेटवर्किंग साइटें युवाओं को बरगलाने का आसान माध्यम बन गई हैं। इन साइटों के जरिए आतंकी मंसूबों को पूरा करने के लिए युवाओं को पहले चुग्गा डालते हैं और एक बार जब बातचीत का सिलसिला शुरू हो जाता है तो उन्हें धर्म के नाम पर भड़काने का काम शुरू हो जाता है।



रुड़की से पकड़े गए संदिग्ध आतंकी आइएसआइएस से सोशल मीडिया के माध्यम से ही संपर्क में आए थे। खुफिया तंत्र व पुलिस पूछताछ में इसकी पुष्टि होने के बाद ऐसे कई सवाल उठने लगे हैं कि इस तरह की फेसबुक आइडी पर शिकंजा कसने में आखिर कहां चूक हो रही है। गूगल या अन्य किसी सर्च इंजन के फेसबुक लागइन के दौरान तमाम ऐसे नाम मिल जाएंगे, जो लड़कियों के फर्जी चेहरे या कार्टून के जरिए बनाई गई हैं। जबकि इन्हें चलाने वाला कोई और होता है। पुलिस सूत्रों की मानें तो आतंकी संगठनों के लिए काम करने वाले कैरियर ऐसी ही फर्जी साइटों, फेसबुक आइडी के जरिए कट्टर सोच रखने वाले युवाओं की तलाश करते हैं। संपर्क हो जाने के बाद अपने-अपने फेसबुक, व्हाट्स एप पर कोड के जरिए बातचीत होने लगती है।



मेराज का फेसबुक वॉल हुआ बंद




रुड़की से पकड़ा गया मोहम्मद मेराज मेडिकल का छात्र था। वह हरिद्वार के ऋषिकुल आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज में बीएएमएस द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। गिरफ्तारी के बाद उसके साथियों ने मेराज के फेसबुक व व्हाट्स एप नम्बर को खोलना चाहा तो वह बंद मिला। मामले की जांच कर रही दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल व उत्तराखंड पुलिस का साइबर इसकी भी जांच में जुट गया है।



मेला नियंत्रण क्षत्र में ऐसे अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं, जो हरिद्वार शहर में चलने वाले किसी भी मोबाइल पर होने वाली बातचीत को रिकार्ड किया जा सकता है। संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर भी जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। जागरण




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