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12 जनवरी  , 2016
संगम किनारे बसे इलाहाबाद शहर के मुस्लिम समुदाय से कुछ लोग बरसों से एक अलग तरह की परंपरा को निभाते आ रहे हैं। इस परंपरा के तहत शहर के लोग राम का नाम लिखकर उसे 'राम नाम बैंक' में जमा करते हैं। यहां सब कुछ आम बैंकों की तरह ही है, बस लेन-देन में पैसे की जगह राम के नाम का प्रयोग होता है। 

इन्हीं श्रद्धालुओं में से एक फैसल खान बताते हैं, 'करीब 10 साल पहले मैंने एक आर्टिकल पढ़ा जिसमें लिखा था कि राम का नाम लेने से मन को शांति मिलती है, बस तभी से मैंने राम का नाम लिखना शुरू कर दिया और इसका असर भी हुआ।'

फैसल इसके अलावा पौष महीने की पूर्णिमा (24 जनवरी) से लेकर माघ महीने की पूर्णिमा (22 फरवरी) तक गंगा किनारे कल्पवास भी करेंगे। उन्होंने बताया कि यह सब उन्हें भीतर से मजबूत बनाता है। उनके अलावा उनके कुछ साथी अब्दुल रब, मोहम्मद आमीन खान और मुख्तार भी साल में हर दिन पांच टाइम नमाज पढ़ते हैं और रमजान के दौरान सारे रोजे भी रहते हैं। लेकिन इसके साथ ही उन्हें भगवद्गीता के ढेरों मंत्र और श्लोक भी याद हैं। 

फैसल पिछले आठ सालों से इस बैंक में राम का नाम लिखते आ रहे हैं। वह हिंदी के अलावा उर्दू और अंग्रेजी में भी राम का नाम लिखते हैं। फैसल ने बताया, 'मैं अब तक राम का नाम लाखों बार लिख चुका हूं।' 

फैसल ने सांप्रदायिक सौहार्द्र पर बात करते हुए कहा, 'हम सभी को सांप्रदायिक सौहार्द्र के बारे में सोचना चाहिए। हमें एक हाथ में गीता तो दूसरे में कुरान रखनी चाहिए। समाज में किसी भी इंसान को उसके धर्म से नहीं पहचाना जाना चाहिए।' 

फैसल ने बताया कि शहर में मुस्लिम समुदाय के कई ऐसे लोग हैं जो रामनवमी के दौरान व्रत रहते हैं। वहीं राम नाम बैंक के प्रेजिडेंट आशुतोष वार्ष्णेय ने कहा कि राम का नाम लिखने से इंसान को असीम शांति मिलती है। पिछले 10 सालों से हजारों लोग जिनमें कई मुस्लिम भी शामिल हैं, इस अनोखे बैंक में राम नाम लिखकर जमा करते आ रहे हैं।  नवभारत


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