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हल्द्वानी  : 17 जनवरी  , 2016
अपनी माटी के प्रति प्रेम और भी बढ़ जाता है, जब दिल में लोकगीत-संगीत की धुन सवार हो। ऐसे ही हैं दो गीतकार व गायक दिल्ली के शिवदत्त पंत व मुंबई के देवकी नंदन कांडपाल, जो लोक कला के वास्तविक रंग को देश ही नहीं, विदेश में भी बिखेर रहे हैं।

दरअसल, इन दोनों कलाकार अपनी टीम के साथ कुमाऊं पहुंचे। हल्द्वानी व रुद्रपुर में आयोजित उत्तरायणी में जबरदस्त प्रस्तुति दी। दैनिक जागरण से मुखातिब व मूल रूप से खुनौली गांव जिला बागेश्वर के कांडपाल ने बताया, पहाड़ की लोक संस्कृति दुनिया में अनूठी है। एक बार जो इससे जुड़ता है, वह इसका ही हो जाता है। इस लोक संस्कृति के प्रशंसक दिल्ली, मुंबई, पंजाब ही नहीं, बल्कि दुबई, अमेरिका, इंग्लैंड आदि देशों में भी हैं। इसके प्रति युवा पीढ़ी का रुझान बढ़ना भी शुभ संकेत है। उन्होंने लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए पर्वतीय झंकार संगठन संस्था भी बनाई है। कांडपाल गीत गुनगुनाते हैं, 'मी आयूं पहाड़ बटि, द्वी रोटी खातिर..'। इस गीत में वह पहाड़ से पलायन की हकीकत को भी दर्शाते हैं। मूल रूप से धारड़ गांव जिला अल्मोड़ा के प्रख्यात लोक गायक शिवदत्त पंत कहते हैं, उत्तराखंड की संस्कृति की सेवा करना और उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना मकसद है। अब तक वह देश-विदेश में 700 से अधिक मंचों पर गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी गीत-संगीत को प्रस्तुत कर चुके हैं। उभरते हुए लोक कलाकारों को प्रशिक्षित कर रहे हैं। कहते हैं, नई पीढ़ी के प्रति रुचि बढ़ रही है। इसलिए ऐसे आयोजनों में दर्शकों का बढ़ना सुखद है। जागरण


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