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देहरादून : 14 जनवरी  , 2016
पूर्व सीएस आइके पांडे की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति
सालभर के भीतर सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी वेतन समिति
राज्य सरकार, निकायों, प्राधिकरणों, स्वायत्त संस्थाओं, प्राविधिक व सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं के कार्मिकों, शिक्षकों, निगमों-उपक्रमों के कार्मिकों के वेतनमानों, पेंशन ढांचे, पेंशनरी लाभ के लिए होंगी सिफारिशें 


प्रदेश में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने का इंतजार कर रहे राज्य के कर्मचारियों को सरकार ने राहत बंधाई है। आयोग की सिफारिशों के मुताबिक राज्य के कार्मिकों के वेतनमानों के पुनरीक्षण को लेकर सेवानिवृत्त मुख्य सचिव इंदु कुमार पांडे की अध्यक्षता में चार सदस्यीय वेतन समिति गठित की गई है। समिति 12 माह, यानी एक साल के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। 

वेतन समिति में बतौर सदस्य कोषागार के सेवानिवृत्त निदेशक शरदचंद्र पांडे व रमेशचंद्र अग्रवाल शामिल किए गए हैं। वित्त सचिव डा एमसी जोशी इसके सदस्य सचिव नामित किए गए हैं। समिति का मुख्यालय उत्तराखंड सचिवालय देहरादून में होगा। समिति विचार-विमर्श के लिए जरूरत के मुताबिक समय-समय पर बैठक करेगी। प्रदेश के विभिन्न वर्गो के कर्मचारियों के लिए वेतनमान और पेंशन के बारे में पहले से स्थापित समतुल्यता के आधार पर तथा सरकार से संदर्भित विषयों पर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। समिति दस बिंदुओं पर विचार कर अपनी सिफारिशें तैयार करेगी। समिति के दायरे में अखिल भारतीय सेवा के सदस्य शामिल नहीं हैं। राजकीय कर्मचारी, सहायताप्राप्त शिक्षण, प्राविधिक शिक्षण संस्थाओं के शिक्षणेत्तर कर्मचारी, स्थानीय निकायों, जल संस्थान, विकास प्राधिकरणों, जिला पंचायतों के कार्मिक, सार्वजनिक निगमों, उपक्रमों और स्वायत्तशासी सरकारी प्रतिष्ठानों के कार्मिक, ऐसे शिक्षक जिनके वेतनमान यूजीसी की सिफारिशों से निर्धारित नहीं होते, जूनियर डाक्टर एवं कार्यप्रभारित कर्मचारियों, समयमान वेतनमान, चयन वेतनमान, वित्तीय स्तरोन्नयन, कार्मिकों को प्राप्त विभिन्न प्रकार के भत्ते एवं सुविधाएं, पेंशन ढांचा और पेंशनरी लाभ के संबंध में समिति सिफारिशें करेगी। सिफारिश के दौरान राज्य की आर्थिक स्थिति में सुधार, कार्मिकों की क्षमता वृद्धि आदि पर विशेषज्ञों के सुझावों, राज्य सरकार पर पड़ने वाले व्ययभार के आकलन, वेतन विसंगति के प्रकरणों का परीक्षण और सातवें वेतन आयोग के परिप्रेक्ष्य में उन पर सुझाव पर समिति गौर करेगी। यह भी स्पष्ट किया गया है कि सार्वजनिक निगमों, उपक्रमों और स्वायत्तशासी सरकारी प्रतिष्ठानों के संबंध में सिफारिशें करते हुए उनकी वित्तीय स्थिति का ध्यान रखा जाएगा।  जागरण


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