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पिथौरागढ़ : 7 जनवरी  , 2016
बृहस्पतिवार को यहां हल्के स्तर के बादल तो दिखाई दिए लेकिन मौसम विभाग ने बारिश की संभावना को बहुत कम बताया है, यदि सिस्टम सही ढंग से सक्रिय होता है तो अगले 48 घंटे में ऊंचाई वाले इलाकों में हिमपात की संभावना बन सकती है। 

लंबे समय से बारिश न होने के कारण चारों तरफ सूखे की स्थिति पैदा हो गई है। अब तो किसानों की निराशा लगातार बढ़ रही है। गेहूं के बीज उग नहीं पाए हैं।

मौसम के बदले रुख से कृषि वैज्ञानिक भी चिंता में हैं। इस बार हरी सब्जियों, मौसमी सब्जियों का उत्पादन गिर जाएगा। जिले में मात्र 13 फीसदी हिस्से में ही सिंचाई की सुविधा है। बारिश न होने से असिंचित क्षेत्रों में फसलों के उत्पादन पर भारी असर पड़ जाएगा। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. आरके सिंह ने कहा कि मौसम की विचित्रता का असर सीधे कृषि उत्पादन पर पड़ेगा।

जंगलों की आग ज्यादा भयावह होने की आशंका
वन विभाग 15 फरवरी से फायर सीजन घोषित कर देता है। वर्ष 2015 में शीतकालीन बारिश अच्छी होने के कारण वन विभाग को जंगलों को आग से बचाने के प्रयास काफी देरी में शुरू करने पड़े। पिछले साल 15 और 16 मई को 75 मिलीमीटर वर्षा हुई थी। 

उसके बाद भी बीच-बीच में हल्की बारिश का क्रम चलता रहा। पिछले साल मई में ही जंगलों में आग की छिटपुट घटनाएं हुई। इस बार आग के खतरे फरवरी से ही बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि जमीन की नमी लगातार कम हो रही है और घास सूखने लगी है | अमर उजाला


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