.

.




हरिद्वार : 12 जनवरी  , 2016
देशभर में कोई भी खास आयोजन हो, विशिष्ट और अति-विशिष्ट व्यक्ति अपने व अपने जानने वालों के लिए विशेष इंतजाम कर ही लेते हैं। कुंभ मेलों में जमा हुई करोड़ों की भीड़ में भी ये वीआईपी अपने लिए विशिष्ट तीमारदारी का इंतजाम कर ही लेते थे। लगता है उत्तराखंड पुलिस ने इस रवायत को बदलने की ठान ली है। 14 जनवरी से हरिद्वार में शुरू होने जा रहे अर्धकुंभ मेले में वीआईपी लोगों को किसी तरह की खास सुविधा नहीं देने का फैसला किया गया है। नेताओं, कारोबारियों, फिल्मी सितारों व अन्य जाने-माने लोग जो कि इस मौके पर गंगा में डुबकी लगाने की सोच रहे हों, उन्हें खुद को पुलिस के इस नए तेवर के लिए तैयार कर लेना चाहिए। 

 पुलिस का कहना है कि उनके पास पहले से ही कर्मियों की कमी है। कुंभ मेले में बाकी सभी कामों के साथ मेले के दौरान चौबीसों घंटे सुरक्षा व्यवस्था देखने और संभालने का काम अपने आप में ही बड़ी चुनौती है। पुलिस किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहती है। अर्धकुंभ की व्यवस्था देख रहे आईजी जी.एस.मरतोलिया ने हमें बातचीत के दौरान बताया, 'हमने इस सिलसिले में एक सलाह जारी किया है। हमने साफ कर दिया है कि जो भी विशिष्ट व अति-विशिष्ट लोग कुंभ के दौरान खास-खास दिनों पर गंगा में डुबकी लगाने आएंगे, उन्हें अपने लिए सुरक्षा व अन्य जरूरी इंतजामों की व्यवस्था खुद ही करनी होगी।' 

मरतोलिया ने आगे कहा कि पुलिसबल फिलहाल इस स्थिति में नहीं है कि अपनी अन्य जिम्मेदारियों के साथ-साथ वीआईपी लोगों के लिए भी सुरक्षा का अलग इंतजाम कर सके। उन्होंने कहा कि पुलिस पहले से ही काम के बोझ तले दबी हुई है। पठानकोट हमले के बाद से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर और भी अधिक सतर्कता बरती जा रही है। इन हमलों को देखते हुए कुंभ में सुरक्षा के और भी पुख्ता इंतजाम करने की जरूरत महसूस की जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि 4 महीने तक चलने वाले इस अर्धकुंभ में 5 करोड़ से भी अधिक श्रद्धालु पहुंचेंगे। ऐसे में पुलिस बल को पूरी मुस्तैदी से जुटे रहना पड़ेगा। मेले की सुरक्षा में नियुक्त वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए वीआईपी लोगों के लिए किसी तरह का अलग इंतजाम करने में असमर्थता जताई है। 

औसतन, इस मेले के लिए पूरे इलाके में सात से 10,000 हजार पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया जाएगा। कुंभ का पूरा इलाका 132 स्क्वेयर किलोमीटर में फैला हुआ है। जनवरी से अप्रैल तक कुल 10 खास स्नान के मौके आएंगे। इन दिनों में 50 लाख लोगों के पहुंचने की उम्मीद लगाई जा रही है। पहला मुख्य स्नान मकर संक्रांति के मौके पर 14 जनवरी को होगा। आखिरी मुख्य स्नान 22 अप्रैल को बुद्ध पूर्णिमा के दिन होना है। 

कुंभ मेले की व्यवस्था के लिए नियुक्त कर्मियों के मुताबिक, मकर संक्रांति (14 जनवरी), महाशिवरात्रि (7 मार्च) और राम नवमी (15 अप्रैल) को सबसे अधिक लोगों के मेले में पहुंचने की उम्मीद है। 2010 के कुंभ मेले में केवल आखिरी तीन दिनों में ही डेढ़ करोड़ से अधिक लोगों ने गंगा में डुबकी लगाई थी।   नवभारत



See More

 
Top