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देहरादून : 15 जनवरी  , 2016

साल 2013 में आई बाढ़ के बाद राहत कार्य के लिए दिए सेंट्रल फंड के 1509 करोड़ रुपये के 'गलत इस्तेमाल' के आरोप का सामना कर रहे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत अपने बचाव में दस्तावेज लेकर सामने आए हैं। बुधवार को रावत ने मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह और आर्थिक सचिव पीसी पंत के साथ उन दस्तावेजों की कॉपियां साझा कीं जिनमें 2013-16 के बीच केंद्र के पैसे को खर्च किए जाने का ब्यौरा था। 

सचिवालय में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बीजेपी द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों का खंडन किया। रावत ने कहा कि केंद्र सरकार ने बाढ़ से प्रभावित हुए अलग-अलग इलाकों में निर्माण कार्य के लिए 7500.90 करोंड़ रुपये अप्रूव किए थे। इनमें केदारनाथ और रुद्रप्रयाग समेत चमोली, उत्तरकाशी, बागेश्वर और पिथौरगढ़ जिले के इलाके शामिल हैं। 

उन्होंने कहा कि दी गई कुल राशि में से 2486.13 करोड़ रुपये छह अलग-अलग विभागों को दिए गए और अब तक 2155.23 करोड़ रुपये बतौर मुआवजा और इंफ्रास्ट्रक्चर के काम में लगाए जा चुके हैं। मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने कहा कि बाकी बचे 331 करोड़ रुपये राहत कार्य में लगाए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि केंद्र की एक योजना के तहत 50 करोड़ की राशि अप्रूव की गई थी, लेकिन अभी तक एक पैसा भी राज्य को नहीं मिला है।

रावत ने कहा, 'पुनर्निर्माण और विकास के अन्य कार्य चल रहे हैं। बची राशि या तो संयुक्त फंडों में जमा की जाएगी या उन्हें जरूरी बहाली के काम में लगाया जा रहा है।' पत्रकारों से बात करते हुए मुख्य सचिव और आर्थिक सचिव ने बताया कि विपक्ष जिस 1509 करोड़ की बात कर रहा है, उसका अस्तित्व ही नहीं है। 

अधिकारियों ने साफ किया कि दी गई आपदा-संबंधी जानकारी फंड जारी करने के लिए नीति आयोग द्वारा बनाई गईं सिफारिशों के आधार दी गई, न कि राशि रिलीज करने के आधार पर। इसलिए 1509 करोड़ रुपये का गैप अनुशासित राशि के आधार पर है, न कि अलग-अलग योजनाओं के लिए केंद्र सरकार द्वारा रिलीज की गई राशि पर। नवभारत टाइम्स


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