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देहरादून  : 22 फरवरी , 2016
अरे वो देखो ‘साइलेंट हीरोज’ जा रहे हैं। 11 दिसंबर-2015 को देश भर में प्रदर्शित होने के बाद फिल्म ‘द साइलेंट हीरोज’ में काम करने वाले मूक बधिर बच्चों की जिंदगी कुछ इसी तरह बदली है। घर हो या बाहर, बस हो या ट्रेन हर जगह लोग इन्हें पहचान लेते हैं। लोग इनके घर जाकर ऑटोग्राफ मांगते हैं। इस फिल्म ने इन्हें न केवल नई पहचान दी है, बल्कि नये सपने बुनने के हौसले भी दिए हैं। फिल्म में भूमिका निभाने वाले दून के 13 छात्रों की आंखों में अब अभिनय का सपना भी पलने लगा है।

‘द साइलेंट हीरोज’ दुनिया की पहली ऐसी फिल्म है, जिसमें मूक बधिर बच्चों की भूमिका मूक बधिर बच्चों ने ही निभाई है। इस फिल्म के बाद लोगों का नजरिया इनके लिए काफी बदल गया है। अपने अभिनय से इन बच्चों ने साबित कर दिया है कि वह किसी से कम नहीं हैं। फिल्म के रिलीज होने के बाद लोगों ने इसे काफी पसंद किया है। 

लोग घर आकर मांगते हैं ऑटोग्राफ
मणि युगांधर के दो बेटों ने फिल्म में काम किया है। मणि बीएलआई में टीचर हैं। मणि ने बताया कि फिल्म क्या रिलीज हुई बच्चे हीरो बन गए। अब तो हर कोई घर बेटों के ऑटोग्राफ लेने आता है। वह कहती हैं कि दोनों बच्चे पढ़ाई में अच्छे हैं। इन्होंने हमारा मान बढ़ाया है। अमर उजाला



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