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देहरादून: 16 फरवरी , 2016
राज्य आंदोलन के दौरान लापता आंदोलनकारियों को 22 साल बाद अब शहीद का दर्जा मिलेगा। शहीदों के माता-पिता के इलाज की व्यवस्था भी सरकार करेगी। राज्य आंदोलनकारियों के परिजनों को संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों की ओर से प्रमाण एवं पहचान पत्र दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को अपने आवास पर शहीदों के परिजनों को सम्मानित करते हुए यह घोषणा की।

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शहीदों के परिजनों के सम्मान में आयोजित समारोह में कहा कि राज्य आंदोलनकारियों को क्षैतिज आरक्षण विषयक विधेयक विधानसभा से पारित करके राजभवन में अनुमति के लिए भेजा गया है।

हमारा प्रयास है कि राज्य आंदोलनकारियों के चिह्नीकरण की प्रक्रिया को पूरा किया जा सके, ताकि उनके लिए सम्मान पेंशन शुरू की जा सके। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह को शहीद राज्य आंदोलनकारियों के परिजनों को प्रमाणपत्र व पहचान पत्र संबंधित जिलाधिकारियों द्वारा अविलंब जारी कराने के निर्देश दिए।

सीएम ने कहा कि शहीद राज्य आंदोलनकारियों के माता-पिता व विधवा को बस पास जारी किए जाएंगे। शहीदों के माता-पिता के इलाज की व्यवस्था भी राज्य सरकार करेगी। इसके लिए दून अस्पताल व हल्द्वानी मेडिकल कालेज को नामित किया जाएगा। अमर उजाला


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