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देहरादून: 16 फरवरी , 2016
टिहरी बांध निर्माण के चलते विस्थापित सैकड़ों परिवार भूमिधरी अधिकार से वंचित हैं। टिहरी झील में न केवल इनके बसे बसाये गांव डूबे, बल्कि अपनी पंचायत चुनने का अधिकार भी डूब गया। यह लोग सांसद और विधायक तो चुन सकते हैं, लेकिन अपना ग्राम प्रधान चुनने का अधिकार इन्हें नहीं है।

करीब डेढ़ दशक से तकरीबन तीन हजार परिवार हक के लिए लड़ रहे हैं। अब मुख्य सचिव ने 23 फरवरी को तमाम पत्रावलियों सहित सचिव राजस्व के साथ हरिद्वार और देहरादून के जिलाधिकारियों की बैठक बुलाई है।

देश को रोशन करने की खातिर अपनी जड़ों से दूर हुए टिहरी बांध के विस्थापित खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। ऋषिकेश, पशुलोक और हरिद्वार के पथरी क्षेत्र के करीब पांच हजार से अधिक परिवारों को भूमिधरी अधिकार नहीं मिले हैं।

पथरी क्षेत्र के गांव तो राजस्व में आ गए, लेकिन, ऋषिकेश और पशुलोक क्षेत्र के दर्जनों गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा नहीं मिल पाया है। इसमें मालीदेवल, गोदी सिराई, बिरानी गांव, उप्पु, डोगरा, असीना, लम्पुगड़ी आदि गांव शामिल हैं। इन गांवों में करीब 20 हजार से अधिक की आबादी रहती है। अमर उजाला



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