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देहरादून : 13 मार्च , 2016

राज्य के कुमाऊं व गढ़वाल मंडल के चाय बागानों तथा कारखानों में कार्यरत 10 हजार कामगारों व 50 फील्ड कर्मचारियों पर आर्थिक संकट मंडरा गया है। पिछले पांच माह से बजट पर ब्रेक लगने से श्रमिकों के मानदेय का तकरीबन 20.20 लाख जबकि कर्मियों का सात लाख रुपया लटक गया है। हालांकि चाय विकास बोर्ड के अधिकारी कहते हैं कि जल्द समाधान करा लिया जाएगा। 

चाय उत्पादन के जरिये प्रदेश की साख मजबूत करने में जुटे कामगारों के खुद की माली हालत खस्ता हो गई है। चम्पावत, घोड़ाखाल व हरिनगर गरुड़ (बागेश्वर) तथा भटौली नौटी (गढ़वाल) के कारखानों तथा पौधालयों में तैनात 10 हजार श्रमिक तथा 50 फील्ड कर्मचारी नाजुक दौर से गुजर रही है। इन सभी का पिछले पांच माह से प्रति श्रमिक 202 रुपये के हिसाब से 2020000 रुपये जबकि 14 हजार प्रति फील्ड कर्मचारी की दर से सात लाख रुपया लटका पड़ा है। बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार बजट न होने से यह समस्या पैदा हुई है। उम्मीद जताई कि शीघ्र आर्थिक संकट दूर कर लिया जाएगा। 



बेतालघाट ब्लॉक में हैं 250 श्रमिक
बेतालघाट ब्लॉक (नैनीताल) के धनियाकोट, रातीघाट, घूना, जजूला, कफुल्टा, फल्याड़ी, पाडली, सिमलखा, सिमराण, बसगांव, खैरना, दोपाखी आदि पौधालयों में ही 250 महिला पुरुष श्रमिक कार्यरत हैं। इनके अलावा 15 फील्ड कर्मचारी भी तैनात हैं। इन सभी का मानदेय न मिलने से माली हालत खस्ता हो चली है। 
इंसेट
'हम बेहद गंभीरता से ले रहे हैं। बजट न मिलने के कारण आर्थिक संकट पैदा हुआ था। प्रस्ताव पास होते ही मानदेय शीघ्र मुहैया करा दिया जाएगा।
डॉ. कृष्णरंजन जोशी, निदेशक चाय विकास बोर्ड, उत्तराखंड
पैकेज
उठने लगे आंदोलन के स्वर 
चाय पौधालयों में कार्यरत महिला पुरुषों को मानदेय न मिलने से आंदोलन के स्वर भी उठने लगे हैं। बेतालघाट ब्लॉक के कामगारों की बैठक में दो टूक चेतावनी दी गई कि यदि जल्द आर्थिक संकट दूर न हुआ तो श्रमिक सड़क पर उतरने को बाध्य होंगे। इस मौके पर चंपा देवी, हंसी देवी, सुनीता देवी, सरस्वती देवी, मुन्नी देवी, विमला देवी, राधा अधिकारी, गीता तिवारी आदि मौजूद रहीं। जागरण


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