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अल्मोड़ा : 10 मार्च , 2016

अल्मोड़ा : वर्षो पुरानी जीर्ण-क्षीर्ण पाइप लाइनों से जहरीला पानी सप्लाई हो रहा है। हालात ये हैं कि जर्जरता के कारण ये लाइनें नालों की गंदगी पेयजल के साथ घर व लोगों के पेट तक पहुंच रही है। जो बेहद चिंताजनक हालात हैं, मगर इनकी कोई सुध नहीं ली जा रही है। वह भी तब जब महकमे ने सामने ऐसे मामले आए हैं। यहां लाला बाजार में ऐसा ही मामला सामने आया और डेढ़ साल पहले रानीधारा में ऐसा मामला सामने आया था। 

नगर में पुरानी आबादी के अनुसार करीब 5-6 दशक पूर्व कई मोहल्लों में बिछी पेयजल लाइनों से ही आज भी काम चल रहा है। खास बात यह है कि अधिकांश घरेलू व सप्लाई लाइनें नाले व नालियों से गुजर रहे हैं। साल-दर-साल बेतरतीब निर्माण के चलते लाइनें मलबे के ढेर में दबते चली गई। जिससे इनकी देखरेख नहीं हो पा रही है। कभी कोई बड़ा फाल्ट आने पर 10 से 12 फिट गहरी खुदाई करने के बाद जर्जर लाइन मिल पाती है। दशकों से मलबे में दबी इन लाइनों को जंक खा गया। इससे मुख्य सप्लाई लाइनों में छेद हो गए हैं। यही वजह है कि जन स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदेह कीटाणु व जहरीले तत्व पेयजल के साथ घर तक पहुंच रहे हैं। लापरवाही का आलम यह है कि कई जगह चोरी-छुपे सीवर का पानी भी इन्हीं नालों में छोड़ा है।  

जल संस्थान के अधिकारियों को भी भली-भांति स्पष्ट नहीं कि पेयजल लाइनें कितनी पुरानी हैं। लाला बाजार में कुछ दिन पूर्व गंदा व दुर्गध युक्त घरों में पहुंचा। शिकायत के बाद हरकत में आए विभाग ने लाइन चेक की, तो पता चला कि बंसल गली में नाले की गंदगी पेयजल के साथ घरों को सप्लाई हो रही थी। ऐसा ही एक मामला डेढ़ साल पहले रानीधारा में पकड़ में आया था। मगर इतनी गंभीर बात से सबक नहीं लिया जा रहा, जो जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ है। अंदेशा है कि ऐसी स्थिति पड़ताल करने पर तमाम जगहों पर हो सकती है। 

पेयजल में ऐसे मिल रही गंदगी
नगर में अधिकांश पेयजल लाइनें सड़क किनारे नालियों या बड़े नालों से सटकर गुजरती हैं। दशकों पुरानी अधिकांश पेयजल लाइनों को जंक खा चुका है, जिस वजह से पाइप लाइनों में छेद हो चुके हैं और गंदा पानी घरों तक पहुंचा रहा है। कई लोगों ने पेयजल संयोजन नई सप्लाई लाइनों से ले लिये, मगर पुरानी लाइनों से लगे कनेक्शन काट खुले छोड़ दिए, जिससे  नाले की गंदगी, कीड़े व कचरे पानी में मिल जा रहे हैं।


बेहद पुरानी पेयजल लाइनों के कारण ऐसी स्थितियां आ रही हैं और संज्ञान में आने पर समस्या समाधान किया जा रहा है। प्राचीन लाइनों व जनसंख्या दबाव के मद्देनजर योजना का नवीनीकरण होना जरूरी है। वहीं बजट की कमी से कई मरम्मत कार्य नहीं हो पा रहे हैं। 
नंद किशोर, ईई, जल संस्थान, अल्मोड़ा | जागरण



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