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हरिद्वार  : 10 मार्च , 2016

अर्द्धकुंभ मेला में सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन मेला अस्पताल में भर्ती मरीज दो वक्त की रोटी को मोहताज हो गए हैं। एक जनवरी से शुरू हुए मेला अस्पताल में भर्ती मरीजों को भोजन नहीं मिल रहा है। मरीजों को दूसरों से मांगकर खाना खिलाया जा रहा है। लावारिस मरीजों को अस्पताल परिसर के कर्मचारी खाना दे रहे हैं। बावजूद इसके अधिकारी एक-दूसरे की कमियां गिनाने की कोशिश में लगे हैं।

अर्द्धकुंभ मेला एक जनवरी से शुरू हुआ था। इसके लिए मेला अस्पताल को स्वास्थ्य विभाग ने बेस अस्पताल के तौर पर स्थापित किया। यहां मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। एक जनवरी से अब तक 302 मरीज भर्ती हो चुके हैं। इन मरीजों को दवा तो मिल रही है, लेकिन सुबह का नाश्ता, दोपहर और रात का भोजन नहीं दिया जा रहा है। स्थानीय मरीजों के तीमारदार अपने घरों से खाना लाकर मरीजों को खिला रहे हैं। कई बार तो उनके पास भी पर्याप्त खाना नहीं होने के कारण एक-एक रोटी से ही काम चलाया गया, तो कभी मरीज भूखे ही रह गए। लावारिस मरीजों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। अस्पताल परिसर के कर्मचारी ही इन्हें बारी-बारी से खाना लाकर दे रहे हैं। भोजन के लिए मरीजों का शोर-शराबा सुनने के बाद भी अधिकारी एक-दूसरे पर आरोप जड़ रहे हैं। कानूनी पेचीदगियों का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।  हिन्दुस्तान



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