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देहरादून : 18 मार्च , 2016

एकला चलो नीति, सलाहकार और कुछ खास अफसरों पर कृपा। कांग्रेस के बागी विधायक अपने फैसले के पीछे मुख्यमंत्री हरीश रावत की इस कार्यप्रणाली को वजह बता रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से नैतिक आधार पर इस्तीफा भी मांगा है।

इस पूरे सियासी ड्रामे के सूत्रधार पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और काबीना मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत ने अपने इस फैसले को राज्यहित में बताया। बकौल बहुगुणा, मैं तो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का समर्थक हूं। उनके बताए रास्ते और सिंद्धातों का पालन करते हुए ही मैने यह फैसला किया। मैं पिछले काफी समय से रावत जी को कार्यप्रणाली सुधारने का अनुरोध कर रहा था। हाईकमान से भी शिकायत की थी। रावत राज्य को विकास के बजाए विनाश की ओर ले जा रहे थे। शराब, खनन, भू उपयोग परिवर्तन समेत कई ऐसे फैसले हैं जो राज्य विरेाधी हैं।

हरक ने कहा कि, अब पानी सिर के ऊपर से गुजर चुका था। मैंने कई बार रावत जी को समझाने की कोशिश भी की, लेकिन उन्होंने नहीं सुनी।

'वर्ष 1969 में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री रहते हुए इंदिरा जी ने भी पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी नीलम संजीव रेड्डी के खिलाफ वीवी गिरी का समर्थन किया था। उन्होंने सभी से आत्मा की आवाज पर वोट देने को कहा था और गिरी जीते भी।
विजय बहुगुणा, पूर्व मुख्यमंत्री

मैंने कई बार कहा प्रदेश में जनता नाराज है। कई बार बताया कि जनता नाराज है पर उन्होंने सुना ही नहीं। मुख्यमंत्री का दफ्तर माफिया का अड्डा बन गया था। विकास में पक्षपात हो रहा था। यह निर्णय राज्यहित में लिया गया है।
डॉ. हरक सिंह रावत, काबीना मंत्री

कुंजवाल के खिलाफ आएगा अविश्वास प्रस्ताव
विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के खिलाफ अविश्वास्त प्रस्ताव लाने की तैयारी की जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने दो टूक कहा कि कुंजवाल विश्वास खो चुके हैँ। मेरे मुख्यमंत्रित्वकाल में उनका आचरण कभी मर्यादित और निष्पक्ष नहीं रहा। पद की मर्यादा को उन्होंने गिरा दिया है। आज सदन में विपक्ष बहुमत में था लेकिन उन्होने बजट पारित करने की घोषणा कर दी। हिन्दुस्तान



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