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देहरादून  : 10 मार्च , 2016

चुनावी वर्ष में उत्तराखंड सरकार ने तीस हजार नौकरियों के रास्ते खोल दिए हैं। खेती और बागवानी को प्राथमिकता देकर रोजगार के मौके बढ़ाने की घोषणा भी सरकार ने की है।

बुधवार को विधान सभा सत्र के पहले दिन राज्यपाल डॉ. केके पाल के अभिभाषण में सरकार ने अपनी योजनाओं का जिक्र किया है। इस साल के अंत में राज्य में विधान सभा चुनाव की आचार संहिता लगनी तय है। ऐसे में सरकार ने हर सेक्टर पर जोर देते हुए बेरोजगारों का भरोसा जीतने की कोशिश की। हालांकि, अभिभाषण में सरकार ने ज्यादातर पुरानी घोषणाओं का बखान किया है, लेकिन मौजूदा वर्ष में इन्हें क्रियान्वित करने को अपनी प्राथमिकता में रखा है।

सरकार की मुख्य योजनाएं
इस वित्तीय वर्ष में 30,000 से अधिक पदों पर अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और लोक सेवा आयोग के माध्यम से नियुक्तियां।

आयोग के माध्यम से लगभग 1100 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू। गहत, काला भप्त, राजमा, पर्वतीय दालों के उत्पादन पर बल।

पहाड़ की स्थानीय फसलों के बीजों पर तीन चौथाई अनुदान।
आपदाग्रस्त क्षेत्रों में कृषि उत्पादों के विपणन पर दस फीसदी बोनस।
कृषि यंत्रों पर 90 फीसदी अनुदान।
पंतनगर विवि, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली औद्यानिकी विवि और बीज एवं तराई विकास निगम के माध्यम से कृषि क्षेत्र में आमूल-चूल बदलाव।
बागवानी को बढ़ावा देने के लिए फल-पौध रोपण योजना।

अभिभाषण को झूठ का पुलिंदा बताया
राज्यपाल के अभिभाषण को विपक्ष ने झूठ का पुलिंदा बताया। नेता प्रतिपक्ष अजय भप्त ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र सरकार की योजनाओं को अपना बताकर श्रेय लेने का प्रयास कर रही है। सरकार केंद्र सरकार की सस्ते एलईडी बल्ब की योजना को अपना बता रही है। एक ओर सरकार कह रही है तीस हजार नौकरियां देंगे वहीं मात्र दो हजार लोगों को रोजगार देने की बात कही जा रही है, जिससे अभिभाषण का झूठ साफ-साफ पकड़ा जा रहा है।  हिन्दुस्तान


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