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रायवाला  : 03 मार्च , 2016

राजाजी टाइगर रिजर्व की चीला रेंज के जंगल में देवी-देवताओं के चित्र उकेरी प्राचीन शिलाएं पाई गई हैं। साथ ही कई ऐसे चिह्न भी पाए गए हैं, जिससे अनुमान है कि कभी यहां बसागत रही होगी। पार्क क्षेत्र में होने के कारण हालांकि पुरातत्व विभाग को यहां खुदाई करने का अधिकार नहीं है।

गंगा भोगपुर गांव से करीब तीन किमी दूर राजाजी टाइगर रिजर्व के विंध्यवासिनी कम्पार्टमेंट नंबर सात के आंवला श्रोत में मौजूद इस बड़ी प्राचीन चट्टान पर कारीगरी का यह बेजोड़ नमूना देखने को मिला है। शिला को काटकर उसमें गणेश, पार्वती, शिव, लक्ष्मी आदि देवी-देवताओं के चित्र उकेरे गए हैं।


पास ही एक खेतनुमा जगह पर खलिहान और एक पत्थर को काटकर बनी ओखली भी है। गौर से देखने पर आसपास कुछ खेतों के होने का पता भी चलता है। लोग अंदाजा लगा रहे हैं कि कालांतर में यहां पर कोई बसागत रही होगी। हालांकि, इसके बारे में कोई प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।


जानकारों का अनुमान है कि 1803 में गढ़वाल राज्य पर हुए गोरखाओं के आक्रमण के दौरान कुछ लोग भागकर भावर के इस क्षेत्र में आ गए थे। संभवत: उन्होंने ही यहां खेत बनाए हों और पूजा पाठ के लिए शिला पर चित्र उकेरे। बाद में ये लोग यहां से चले गए। 1983 में यह क्षेत्र राजाजी नेशनल पार्क के अधीन आ गया। रेंज अधिकारी चीला सुभाष घिल्डियाल का कहना है कि उन्होंने यहां शिलाएं पाईं हैं, लेकिन यह कितनी पुरानी है इस बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता। राजाजी पार्क क्षेत्र में होने के चलते यहां पुरातत्व विभाग को खुदाई करने का अधिकार नहीं है। जागरण



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