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देहरादून: 13 मार्च , 2016

उत्तराखंड में शुक्रवार को पेश हुए बजट में कांग्रेस की सरकार ने 2013 की केदारनाथ आपदा में मारे गए लोगों की विधवाओं को उच्च नस्ल की गाय देने की घोषणा की है। हालांकि इस घोषणा के बावजूद विधवाओं के गांव के नाम से प्रसिद्ध देवली के लोगों में खुशी की लहर नहीं है। 

हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने केदारनाथ आपदा की विधवाओं से फोन पर बात की। इन विधवाओं ने दावा किया कि वे अपने लिए गायों की बजाए परिवार के सदस्य के लिए नौकरी चाहती हैं। 

अनुजा तिवारी के पति रोहित तिवारी की इसी आपदा के दौरान मौत हो गई थी। उन्हें बजट में इस प्रवाधान से ज्यादा खुशी नहीं हुई है। उन्होंने कहा, 'मैं ग्रैजुएट हूं। मैंने कंप्यूटर डिप्लोमा किया है और अपनी दो बेटियों को पाल रही हूं। दोनों कॉलेज में हैं। मेरे घर का चूल्हा जलता रहे, इसके लिए मुझे उच्च नस्ल की गाय की नहीं, बल्कि एक नौकरी की जरूरत है।' 

गांव की आबादी एक हजार से ज्यादा है। गांव की दूसरी विधवा ने भी इसी तरह की बात कही है। पूनम तिवारी ने कहा, 'राज्य सरकार ने हमें उस समय मुआवजा दिया था, लेकिन हम नौकरी चाहते हैं। इससे ही हमारे परिवारों को चलाने के लिए एक नियमित आय मिलेगी। नवभारत



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