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कोटद्वार   : 08 मार्च , 2016

कोटद्वार शहर से सटे शिवालिक नगर में आबादी के बीच घुसकर सात घंटे तक वन कर्मियों और लोगों की सांसें अटकाए रखने वाला तेंदुआ आखिरकार शूटर जॉय हुकिल के हाथों मारा गया। इसके पहले वह दो कर्मचारियों पर हमला कर उन्हें घायल कर चुका था। तेंदुए के ढेर होने के बाद गांव वालों के साथ ही वन विभाग ने राहत की सांस ली। हालांकि, वन विभाग की आधी-अधूरी तैयारियां एक बार फिर से नुमांया हुई।

बीती सुबह करीब आठ बजे एक तेंदुआ यहां बाबू रावत की गौशाला में आ धमका। इससे पहले कि वह गाय पर हमला करता, घर के सदस्यों ने डंडे से हमला कर दिया। इस पर तेंदुआ वहां से भाग कर पास ही अमर कॉलोनी स्थित एक खेत में घुस गया।

थोड़ी ही देर में पूरे इलाके में यह खबर आग की तरह फैल गई। तेंदुए को देखने के लिए काफी संख्या में ग्रामीण वहां एकत्र हो गए। सूचना पर प्रभागीय वनाधिकारी नीतीश मणि त्रिपाठी, तहसीलदार अबरार हुसैन, कोतवाल जेएस पुंडीर मौके पर पहुंचे।

इस बीच, कालागढ़ टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. कोको रोसे भी टीम के साथ वहां बुला लिया गया। दोपहर करीब दो बजे रामनगर से विशेषज्ञ ट्रैंक्यूलाइजर गन के साथ मौके पहुंचे। टीम ने तेंदुए को दबोचने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। पौने तीन बजे विशेषज्ञ खेतों में दुबके तेंदुए को ट्रैंक्युलाइज करने के लिए इंजेक्शन दाग पाए

कोटद्वार के शिवालिक नगर में घुसा तेंदुआ

लगभग 20 मिनट इंतजार करने के बाद वन कर्मियों ने जैसे ही गुलदार की तरफ जाल फेंका, तभी वह आक्रामक हो उठा। वन कर्मी कुछ समझ पाते इससे पहले तेंदुए ने लैंसडौन वन प्रभाग के कर्मचारी नरेंद्र रावत पर हमला कर दिया। पास में खड़े एक अन्य कर्मचारी ने हवा में फायर दागा तो तेंदुए ने वहां मौजूद कोटद्वार रेंज के वन दरोगा धीरेंद्र  सिंह पर झपट्टा मार दिया। हमले में दोनों कर्मचारी घायल हो गए। उनके पेट और पीठ पर तेंदुए के पंजों व दांत के निशान आए हैं।



चारों तरफ भीड़ से घिरा देख तेंदुआ और आक्रामक हो गया। जाल से निकलकर वह फिर से शिवालिक नगर की तरफ भागते हुए जगतराम नौगाईं के आंगन में जा धमका। उस वक्त श्री नौगाई की पत्नी शांति देवी आंगन की सफाई कर रही थी। तेंदुआ उन पर झपट्टा मारता, इससे पहले शिकारी जॉय हुकिल ने हमलावर गुलदार पर निशाना साध दिया, जिससे तेंदुआ वहीं ढेर हो गया।

आबादी में घुसा तेंदुआ, दहशत के सात घंटे बाद ढेर 

जॉय हुकिल तेंदुए का पीछा करते हुए वहां तक पहुंचे थे। पूरा घटनाक्रम करीब सात घंटे चला। इसके बाद ही लोगों ने राहत की सांस ली। माना जा रहा है कि अगर शिकारी उस पर निशाना नहीं साधते तो वह भीड़ में कई पर हमला कर सकता था। मारे गए तेंदुए की उम्र लगभ छह साल होने का अनुमान है। सनेह रेंज में पोस्टमार्टम के बाद उसके शव को नष्ट किया गया। इधर, तेंदुए के हमले में घायल वन कर्मियों को राजकीय संयुक्त चिकित्सालय में उपचार दिलाया गया। जागरण


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