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देहरादून : 29 मार्च , 2016

पिछले दिनों  भाजपा की ओर से आयोजित रैली में पुलिस विभाग के प्रशिक्षित घोड़े ‘शक्तिमान’ के घायल होने के बाद पशु क्रूरता निवारण अधिकारी-1960 (पीसीए एक्ट) में संशोधन की मांग उठने लगी है। उत्तराखंड पशु कल्याण बोर्ड (यूएडब्ल्यूबी) ने सालाना बोर्ड बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव पारित कर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण से जुड़े पशु कल्याण बोर्ड के निदेशक को भेज दिया है। 

यूएडब्ल्यूबी की ओर से केंद्र को भेजे गए प्रस्ताव में निदेशक डा. कमल मेहरोत्रा का कहना है कि दशकों पुराने पीसीए एक्ट में पशु क्रूरता होने की स्थिति में शमन शुल्क की धनराशि 25 से लेकर 100 रुपये तक है जो कि बेहद कम है। 

अफसरों को मिले शमन शुल्क निर्धारित की अनुमति
साल 1960 में एक्ट के वजूद में आने के बाद इसमें किसी भी प्रकार का संशोधन नहीं किया गया है। ऐसे में अब वक्त आ गया है कि एक्ट में संशोधन किया जाए। 

इतना ही नहीं बोर्ड की सालाना बैठक में यह प्रस्ताव भी पारित किया गया है कि पशुओं के साथ होने वाली क्रूरता में विभागीय अफसरों को शमन शुल्क निर्धारित करने की अनुमति प्रदान की जाए। 

कारण कि प्रकरण के अदालत में जाने के बाद न सिर्फ वक्त की बर्बादी होती है बल्कि 100 रुपये शमन वसूलने के एवज में विभाग को हजारों का नुकसान उठाना पड़ता है। प्रस्ताव में यह भी कहा है कि साल 2014 में भी इसी तरह का प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा था, लेकिन आज तक उस पर सुनवाई नहीं हो पाई है। अमर उजाला


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