.

.




देहरादून : 18 मार्च , 2016

रावत सरकार के खिलाफ बगावत के बाद सरकार के भविष्य को लेकर सवाल उठ गए है। कांग्रेस जहां अपनी सरकार को सुरक्षित बता रही है, वहीं भाजपा का दावा है कि सरकार वैधानिक रूप से गिर चुकी है। संसदीय कार्यप्रणाली के जानकारों का मानना है कि कांग्रेस और भाजपा, दोनों के लिए अब भी संभावनाएं 50-50 ही हैं।

एसे बच सकती है सरकार:
1- कांग्रेस के नौ विधायकों ने सरकार के खिलाफ वोट किया है। पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने पर इनकी सदस्यता निरस्त की जा सकती है। नौ सदस्य कम होने पर सदन में बहुमत का निर्धारण 61 विधायकों के आधार पर किया जाएगा। ऐसे में भाजपा के केवल 28 विधायक है जबकि कांग्रेस के पास पीडीएफ के समर्थन के साथ 33 विधायक होंगे। ऐसे में रावत सदन में बहुमत साबित कर सकते हैं।

2- विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल सदन के भीतर बजट के ध्वनिमत से पारित होने की घोषणा कर चुके हैं। ऐसी स्थिति में सरकार को संकट में नहीं माना जा सकता।
3- कांग्रेस को उम्मीद है कि आज विरोध करने वाले नौ विधायकों में कुछ वापस लौट सकते हैं। ऐसा होने पर कांग्रेस का मौजूदा बहुमत बरकरार रहेगा।

भाजपा यूं गिरा सकती है सरकार
1- बजट पर मतदान के दौरान भाजपा और कांग्रेस के बागी विधायकों की संयुक्त संख्या 35 थी। जबकि कांग्रेस के समर्थन में केवल 32 विधायक ही थे। सदस्य संख्या के आधार पर भाजपा का दावा है कि बजट पारित ही नहीं हुआ है। लिहाजा सरकार गिर चुकी है।

2- बगावत के कारण कांग्रेस के नौ विधायक घट चुके हैं। ऐसे में भाजपा राज्यपाल से सरकार के अल्पमत में होने का आधार बनाते हुए सरकार को भंग करने की मांग कर सकती है। पीडीएफ के विधायक यदि कांग्रेस से समर्थन वापस ले ले तो सरकार के बचने की कोई संभावना नहीं है।

3- विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर बजट पारित करने के उनके फैसले को निरस्त कर सकती है। हिन्दुस्तान


See More

 
Top