.

.



देहरादून : 17 अप्रैल  , 2016

ऑल इंडिया कांफ्रेंस ऑफ इंटेलेक्चुअल्स ने शिक्षा, सामाजिक कार्य, स्वास्थ्य आदि क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए 14 लोगों को उत्तराखंड रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किया। आईसीएफआरई के सभागार में आयोजित समारोह में छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यपाल ले. जनरल केएम सेठ बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे।

रविवार को आयोजित उत्तराखंड रत्न समारोह में जलवायु परिवर्तन का पर्यावरण पर प्रभाव और बुद्धिजीवियों की भूमिका विषय पर संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया। पूर्व राज्यपाल ले. ज. केएम सेठ रिटायर्ड ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग, विश्व के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। हमें विकास के नए व स्थाई मॉडल तलाशने की जरूरत है।

इंसान को खुद के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए प्रकृति का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग के सदस्य राजेश टंडन ने कहा कि एक जागरूक व्यक्ति और समाज ही सही फैसला लेकर इस वैश्विक संकट से लड़ने में मदद कर सकता है।

उत्तराखंड का उदाहरण देते उन्होंने बताया कि किस तरह पर्यावरणीय मसलों पर एक व्यक्ति की पहल बड़े बदलाव की सूत्रधार बन गई। उन्होंने रिन्युएबल एनर्जी के महत्व पर भी प्रकाश डाला। आईसीएफआरई के महानिदेशक डा. अश्वनी कुमार ने कहा कि जीवाश्म ईंधन को जलाने और पेड़ पौधों को काटने से हम वायुमंडल में कार्बन डाईऑक्साइड का स्तर बढ़ा रहे हैं, इससे तापमान बढ़ रहा है।

वर्ष 2000 से 2010 के बीच कार्बन उत्सर्जन की दर पिछले एक दशक की तुलना में चार गुना बढ़ चुकी है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए जहां तक हो सके हमें अपनी जीवनशैली को कम कार्बन उत्सर्जन करने वाली जीवनशैली में तब्दील करना होगा। इस मौके पर उद्योगपति डा. एस फारूख, संस्था के राष्ट्रीय महासचिव प्रकाश निधि शर्मा, अजय भारद्वाज, एएन शर्मा सहित भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।

इन्हें दिया गया उत्तराखंड रत्न
प्रो. पीके गर्ग, प्रो. ललित मोहन तिवारी, डा. राकेश, डा. उमा शर्मा, ललित मिगलानी दिनेश जैन, लोपजंग थसटॉब, हकीम इशरत हुसैन फारूखी, सुनील कुमार सैनी, मधु बैरी, हेमंत कुमार जोधानी, सुरजीत सिंह खैरा, डा. गुरबीत, अदिति शर्मा और संदीप जैन। अमर उजाला


See More

 
Top