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दोस्तों अमीरी गरीबी धूंप छाँव की तरह होती है। आती है चली जाती है। हर कोई नाम और पैसा कमाना चाहता है। किसी को जल्दी और बड़ी आसानी से मिल जाता है और किसी को खूब मेहनत करने के बाद भी देर से मिलता है। पर इन्सान को कभी हिम्मत नही हारनी चाहिए। मुझे हमेशा मेरी माँ जी की बाते याद रहती है। जो हमेशा मुझे कहा करती है। कर्म किये जा फल की चिंता मत कर। दोस्तों देखलो 2001 में पुष्प विहार दिल्ली में कभी मेरा खोका हुवा करता था। पान बीड़ी उत्तराखंडी C.D जेसे छोटे मोटे सामान रखता दोस्तों में जन्म से गरीब नही था। अच्छे परिवार से था पर किस्मत कब क्या दिन दिखा दे किसी को नही पता। पर अच्छे कर्म और अच्छा वेहवार हमेशा काम आता है। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुवा 2001 मार्च में जब मुझे मुकेश कठेत जी मिले जिन्होंने मेरे सर पे अपना हाथ रखा और मुझे अपने साथ कला छेत्र में जोड़ लिया। बस दोस्तों अपनी भी निकल पड़ी जो अच्छे कर्म किये थे उसका फल भोग रहा हूँ। आप लोग भी अच्छा वेहवार रखे और मेहनत करें किस्मत तुम पे भी मेहरबान जरुर होगी।


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