.

.




हरिद्वार : 03 अप्रैल  , 2016

गंगा किनारे बीच कैंपिग किए जाने के संबंध में केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय ने वन भूमि हस्तांतरण के लिए हरी झंडी दे दी है। अभी 18 हेक्टेयर वन भूमि का गैर-वानिकी कार्य के लिए हस्तांतरण किया जा रहा है।

उत्तराखंड वन विकास निगम ने शासन को पत्र भेजकर इस संबंध में दिशा-निर्देश देने के लिए कहा है। प्रदेश में बीच कैंपिग नीति अभी तैयार नहीं हुई है। इसका ड्राफ्ट शासन में विचाराधीन है।

गंगा किनारे वन भूमि पर बीच कैंपिग करने के लिए शासन ने निजी कंपनियों पर रोक लगा दी है। शासन ने बीच कैंपिग कराने की जिम्मेदारी उत्तराखंड वन विकास निगम को दी है। 

वन निगम का यह प्रस्ताव साइट पर है अपलोड 
वन निगम ने इस योजना को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया है। सबसे पहले फारेस्ट राइट एक्ट के तहत वन भूमि को गैर वानिकी कार्य के लिए हस्तांतरित किया जा रहा है। 18 हेक्टेयर भूमि के हस्तांतरण के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई है। वन निगम का यह प्रस्ताव साइट पर अपलोड है। 

उत्तराखंड वन विकास निगम के प्रबंध निदेशक एसटीएस लेप्चा ने बताया कि दिशा-निर्देश प्राप्त करने के संबंध में शासन को पत्र लिखा गया है।
बता दें कि बीच कैंपिग के संबंध में शासन ने अभी नीति तैयार नहीं की है। इसका ड्राफ्ट शासन में है। बीच कैंपिग की नीति का ड्राफ्ट नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल के निर्देशों के लिहाज से अपडेट किया जाना है।   अमर उजाला


See More

 
Top