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देहरादून: 19 अप्रैल  , 2016

मंगलवार को महामहिम राज्यपाल के दौरे के दौरान दो महिला पार्षदों के साथ जो सुलूक हुआ वह चौंकाने वाला था। दो महिला राज्यपाल के समक्ष फ्लाईओवरों को लेकर अपना विरोध दर्ज करवाने के लिए समर्थकों को साथ लेकर पहुंची थी। राज्यपाल का काफिला जैसे बल्लीवाला चौराहे पर पहुंचने वाला था इनमें से एक पार्षद शारदा गुप्ता ने अपने समर्थकों के साथ राज्यपाल की कार को हाथ देकर रोकने की कोशिश की। यह अलग बात है कि राज्यपाल ने भीड़ को देखकर गाड़ी नहीं रोकी और निर्धारित कार्यक्रम के तहत बल्लीवाला फ्लाईओवर के निरीक्षण स्थल पर पहुंच गए। उनके पहुंचते ही दोनों पार्षद अपने समर्थकों के साथ राज्यपाल से अपनी मांग रखने की जिद करने लगी। राज्यपाल कुछ देर के लिए रुक गए लेकिन महिलाओं ने अपनी बात पुरजोर तरीके से रखने की कोशिश की। इसपर राज्यपाल के एक सुरक्षाकर्मी ने महिला पार्षद को करीब जाने से रोकने के लिए उनका हाथ पकड़ कर पीछे धकेल दिया। एक उच्च पुलिस अधिकारी के अनुसार वीवीआईपी सुरक्षा की ड्रिल में यह तय है कि क्लोज प्रोटेक्शन थीम के तहत अगर कोई सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश करे तो उसको रोका जाना है, लेकिन एक सवाल तब भी है। 

सवाल यह है कि सुरक्षाकर्मी ही सही किसी महिला को इस तरह से हाथ पकड़कर धकेलना कहां तक उचित है? अगर सामान्य अवस्था में ऐसा होता तो क्या मामला लज्जा भंग का नहीं बन जाता? अमर उजाला



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