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देहरादून  : 05 अप्रैल  , 2016

प्रदेश में गैर सरकारी वाहनों पर नेम प्लेट लगाना प्रतिबंधित कर दिया गया है। मंगलवार को इस संबंध में मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने आदेश जारी कर दिया है। सरकारी अधिकारी भी निजी वाहनों पर अपने नाम या कार्यालय से संबंधित प्लेट नहीं लगा सकेंगे। 

अगर कोई प्रतिबंध का पालन नहीं करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर जारी निर्देशों के अनुपालन में शासन ने यह निर्णय लिया है।

शासनादेश में कहा गया कि वाहनों के नंबर प्लेट पर पंजीयन संख्या के अतिरिक्त कुछ भी अंकित किया जाना दंडनीय अपराध है। प्रवर्तन की कार्रवाई के दौरान यह देखा गया है कि निजी वाहनों, टैक्सी एवं किराए के वाहनों पर रजिस्ट्रेशन नंबर के अतिरिक्त लोग प्लेट पर पद नाम, संगठन का नाम, के पद, संस्था, प्रतिष्ठान का नाम आदि अंकित करा लेते हैं। 

सरकार की मुहर, चिन्ह का नियम विरुद्ध किया जा रहा प्रयोग 
नाम पट्टिका के अलावा उत्तराखंड सरकार की मुहर, चिन्ह का नियम विरुद्ध प्रयोग किया जा रहा है। इससे प्रशासनिक अव्यवस्था और दुरुपयोग की संभावना रहती है। 

अगर किसी वाहन पर नीली बत्ती लगी है और उसमें उच्च पदस्थ व्यक्ति नहीं है तो इसे काले कपड़े से ढंक दिया जाएगा। आदेश में स्पष्ट है कि दोषी के खिलाफ केंद्रीय मोटरयान नियमावली 1989 के प्रावधानों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

शासन या सरकारी अधिकारी की श्रेणी
श्रेणी (क) फ्लैशर युक्त पीली बत्ती (जब तक यान राज्य में कहीं ड्यूटी पर हो)
-अपर मुख्य सचिव, औद्योगिक विकास आयुक्त, आयुक्त वन एवं ग्राम्य विकास, प्रमुख सचिव, सचिव, पुलिस महानिदेशक, अपर पुलिस महानिदेशक, मंडलायुक्त, परिवहन आयुक्त, आबकारी, व्यापार कर आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, परिक्षेत्रीय पुलिस उप महानिरीक्षक

श्रेणी (ख) फ्लैशर युक्त नीली बत्ती (सिर्फ ड्यूटी के समय)
जनपद न्यायाधीश, उच्च स्तर न्यायिक सेवा के अधिकारी, डीएम, सीडीओ, एसएसपी, एसपी, एएसपी, सीओ, तहसीलदार, प्रवर्तन ड्यूटी के दौरान सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी, जिला आबकारी, और व्यापार कर अधिकारी तथा वन विभाग के सिर्फ प्रवर्तन अधिकारी। अमर उजाला


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