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देहरादून : 06 अप्रैल  , 2016

उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू करने के मामले में केंद्र सरकार को हाई कोर्ट में झटका लगा है। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने बुधवार को इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए केंद्र सरकार को और वक्त देने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि विनियोग विधेयक के मसले पर वह तब तक सुनवाई नहीं करेगा जब तक कि केंद्र इस मसले पर अपना स्टैंड कोर्ट में दाखिल न कर दे।

बुधवार को हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा, 'अटॉर्नी जनरल को सुने बगैर कोई आदेश नहीं दिया जाएगा।' केंद्र ने कोर्ट से हलफनामा दाखिल करने के लिए और वक्त मांगा था। इससे पहले मंगलवार को कांग्रेस ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखा।

उधर, स्पीकर गोविंद कुंजवाल ने अपने हलफनामे में कहा कि संविधान का आर्टिकल 212 उन्हें विधानसभा के संचालन का अधिकार देता है और वित्त विधेयक ध्वनि मत से पारित किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि वित्त विधेयक गवर्नर की मंजूरी के लिए 19 मार्च को भेजा गया था। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्य के लिए केंद्र द्वारा जारी किए गए विनियोग अध्यादेश को चुनौती दी है।

उनका कहना है कि एक अप्रैल के बाद राज्य की वित्तीय जरूरतों के लिए अध्यादेश लाना असंवैधानिक है और ऐसा राज्य में अवैध तरीके से लगाए गए राष्ट्रपति शासन को वाजिब ठहराने के लिए किया गया है। हरीश रावत की याचिका पर उत्तराखंड हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और कांग्रेस को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 5 अप्रैल तक का वक्त दिया था। नवभारत


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