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देहरादून : 02 अप्रैल  , 2016

'​उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और अब कांग्रेस के नौ बागी विधायकों की अगुवाई कर रहे विजय बहुगुणा ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी से रिश्तों को वे अब बहुत पीछे छोड़ चुके हैं। हालांकि इसके साथ उन्होंने यह भी साफ किया कि राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति में उन्होंने अपने सभी विकल्प खुले रखे हैं।'


इन नौ विधायकों को स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य करार दिया था।

आठ अन्य विधायकों के साथ बहुगुणा गुरुवार को दिल्ली से देहरादून लौटे। वह बीजापुर एरिया में अपने आवास पर संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे। बहुगुणा ने कहा, 'हमने एक राजनीतिक कदम उठाया है। एक सरकार गिराई है। जानबूझकर गिराई है। उसके क्या नतीजे होते हैं, हम जानते हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ बहुगुणा की सियासी अदावत उत्तराखंड में किसी से छिपी नहीं है। फरवरी 2013 में बहुगुणा की जगह रावत ने ली थी। अब बहुगुणा ने दावा किया कि उन्होंने राज्य की जनता के हितों के लिए रावत को सत्ता से बाहर करने का कदम उठाया। उन्होंने कहा, 'यह संभवत पहला उदाहरण है, जिसमें सदन में विनियोग विधेयक पास न होने पर भी एक मुख्यमंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया।' बहुगुणा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि रावत से उनकी कोई निजी खुन्नस नहीं है। बहुगुणा ने कहा कि रावत सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए भ्रष्टाचार की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'राज्यपाल ने अवैध खनन पर अंकुश के जो कदम उठाए, उनके लिए मैं उनकी प्रशंसा करता हूं।'

बहुगुणा ने कांग्रेस के बागियों को अयोग्य करने के कुंजवाल के निर्णय को असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा, 'वह समय से होड़ कर रहे थे।' बहुगुणा ने यह साफ नहीं किया कि विधानसभा चुनाव से पहले वह कोई नया दल बनाएंगे या नहीं। उन्होंने कहा, 'हम अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं से विचार-विमर्श करेंगे।'   नवभारत


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