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देहरादून: 19 मई, 2016

कांग्रेस के नौ बागियों का विलय भाजपा ने 2017 के विधानसभा चुनावों की रणनीति का अहम हिस्सा है। बागियों को लेकर प्रदेश लीडरशिप में कसमसाहट के बावजूद केंद्रीय लीडरशिप का निर्णय विधानसभा चुनाव में भाजपा की संभावनाओं को देखकर लिया गया है।

लीडरशिप ने सभी बागियों की पॉल्टिकल बैकग्राउंड का आकलन कर उनके विधानसभा क्षेत्रों में पकड़ को आधार बनाया है। नौ बागियों से अधिकांश अपने विधानसभा क्षेत्रों में मजबूत हैं, जिसका फायदा भाजपा उठाना चाहती है। कांग्रेस की दिक्कत यह है कि बागी अपने साथ विधानसभा क्षेत्र में बूथ स्तर पर उसे नुकसान पहुंचाएंगे। इतना ही नहीं भविष्य में कांग्रेस में सेंधमारी के लिए बागी भाजपा के लिए अहम साबित हो सकते हैं।

बागियों के भाजपा में शामिल होने से साबित हो गया कि 18 मार्च से शुरू हुआ सियासी घमासान अभी शांत नहीं होगा। भाजपा बागियों को लेकर एक तीर से कई निशाने साधने की रणनीति लेकर चली थी, जिसमें सरकार गिराने की कोशिश भले नाकाम हो गई पर अब अगली सरकार किस तरह से भाजपा की बने इसपर कसरत शुरू कर दी है। अमर उजाला


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