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देहरादून : 05 मई, 2016

इस बार जहां देश में सूखे की मार से किसानों की बुरी तरह से कमर टूट गई, वहीं उत्तराखंड के तराई ने गेहूं का रिकार्ड तोड़ उत्पादन किया।

पिछले साल जहां तराई में बेमौसमी बारिश ने किसानों को बर्बाद कर दिया था, वहीं इस बार गेहूं की खेती ने किसानों की पिछले साल की भी भरपाई कर दी है। 2012-13 और 2014 में तराई का गेहूं उत्पादन 38 क्विंटल प्रति हेक्टर था, जिसे तराई के किसान अच्छा मानते थे, लेकिन इस बार 39 क्विंटल प्रतिहेक्टयर उत्पादन ने किसानों की बांछें खिला दी हैं।

कृषि विभाग के अनुसार इस बार तराई में सूखे की कोई मार नहीं पड़ी। यहां पर अधिकांश किसानों के पास खेती की सिंचाई करने के लिए तमाम तरह के निजी संसाधन उपलब्ध हैं। वहीं यहां पर कॉमर्शियल सीड का भी भारी मात्रा में उत्पादन होता है और इससे उत्तर प्रदेश, बिहार सहित देश के करीब 15 से अधिक राज्यों में तराई का सीड सप्लाई हो रहा है।

तराई में दो तरह के सीड प्लांट हैं, जिनमें एक तो निजी सीड प्लांट हैं जो यहां से बाहरी प्रांतों को बीज भेजते हैं, इसमें सबसे अधिक बीज यूपी और बिहार को जाता है। सरकारी सीड प्लांटों में टीडीसी और एनएससी भी बीज तैयार करके आंध्र प्रदेश, हैदराबाद, अरुणाचल, बंगाल सहित दक्षिण के राज्यों में भी बीज की सप्लाई करते हैं।

देश में सूखे से जहां काफी बुरे हाल रहे हैं वहीं तराई में इस बार गेहूं का उत्पादन अच्छा रहा है। यहां पर सिंचाई के लिए भी किसानों के पास कई संसाधन हैं। इस बार मौसम ने भी साथ दिया। अब तक के क्रॉप कटिंग परीक्षण में जो रुझान विभाग के पास आए हैं उसमें इस बार 39 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रहा है। पिछले वर्ष मौसम की मार से तराई में 29.6 क्विंटल प्रति हेक्टर उत्पादन रहा है, इस बार तराई ने रिकार्ड तोड़ उत्पादन किया है।
- पीके सिंह, मुख्य कृषि अधिकारी

पूरे देश में है टीडीसी के बीजों की मांग
अपनी गुणवत्ता और उन्नत नस्ल के बीजों की पैदावार के लिए तराई बीज विकास निगम की पूरे देश में अपनी एक अलग पहचान है। यहां का बीज न केवल तराई में बल्कि पूरे देश को सप्लाई होता है। इस बार तराई में रिकार्ड तोड़ गेहूं उत्पादन में टीडीसी के बीजों का भी अहम योगदान रहा है। टीडीसी तराई के काश्तकारों को बेहतर नस्ल के बीच मुहैया कराती आई है।

सूबे के सूखाग्रस्त इलाकों को तराई से सप्लाई
रुद्रपुर (ऊधमसिंह नगर)। तराई में गेहूं की रिकार्ड पैदावार को देखते हुए राज्य के एकमात्र जिले ऊधमसिंह नगर से जहां कुमाऊ मंडल के पांच जिलों अल्मोड़ा, नैनीताल, बागेश्वर, चंपावत, पिथौरागढ़ को किसान सीधे गेहूं की आपर्ति करने में सक्षम हैं, वहीं गढ़वाल मंडल के देहरादून, हरिद्वार सहित अन्य जनपदों को भी गेहूं की सप्लाई तराई का किसान ही कर रहा है।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सतनाम सिंह चीमा का भी मानना है कि तराई से गेहूं की आपूर्ति यूपी को ही नहीं होती, बल्कि उत्तराखंड के 12 जिलों को तराई का किसान ही गेहूं की आपूर्ति कर रहा है। उन्होंने बताया कि तराई का किसान सहकारी समितियों पर निर्भर नहीं है। अमर उजाला


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