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देहरादून: 25 मई, 2016

असम में नक्सली हमले में द्रोणनगरी देहरादून के निवासी हवलदार महेश गुरुंग शहीद हो गए। 22 मई को हुए इस हमले में अर्द्धसैनिक बल असम रायफल्स के छह जवान शहीद हुए। आज दोपहर शहीद गुरुंग का देहरादून। असम में नक्सली हमले में द्रोणनगरी देहरादून के निवासी हवलदार महेश गुरुंग शहीद हो गए। 22 मई को हुए इस हमले में अर्द्धसैनिक बल असम रायफल्स के छह जवान शहीद हुए। आज दोपहर शहीद गुरुंग का पार्थिव शरीर इंफाल से विमान द्वारा दिल्ली लाया गया। वहां से देर शाम उनका शव यहां जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचा। उनके अंतिम-संस्कार की तैयारी की जा चुकी थी पर देर होने के कारण अंतिम-संस्कार अब बुधवार सुबह किया जाएगा। शव घर लाने की बजाय सीधे सैन्य अस्पताल गढ़ीकैंट ले जाकर फ्रीजर में रखा गया। उधर, शहीद के घर मातम छा गया और शोक-संवेदना जताने वालों की भीड़ लगी रही। 


देहरादून के दूधली-डोईवाला मार्ग पर मोथरोवाला ग्राम सभा के दौड़वाला सैन्य बस्ती निवासी स्व. सुंदर गुरुंग के चार बेटों में महेश सबसे छोटे थे। करीब 42 वर्षीय महेश ने एसजीआरआर स्कूल से 12वीं की और इसी दौरान 1990 में असम रायफल्स में बतौर जवान भर्ती हो गए। वर्ष 2002 में उनकी शादी सीमा गुरुंग से हुई। अगले ही वर्ष महेश व सीमा को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। बेटा आयुष गुरुंग इस समय 13 वर्ष का है। महेश के बड़े भाई गप्पू गुरुंग भी फौज में थे और अब सेवानिवृत्ति के बाद यहीं परिवार समेत रह रहे हैं। मंझले भाई रमेश गुरुंग यहीं निजी काम करते हैं और उनसे छोटे सुरेश गुरुंग गोरखा रायफल्स में हैं। सुरेश कारगिल में तैनात हैं, मगर छोटे भाई के शहीद होने की सूचना पर वह भी घर आ रहे हैं। बताया गया कि बुधवार की सुबह तक सुरेश घर पहुंचेंगे। मां संतमाया भी बेटों के साथ यहीं रहती हैं।


मंगलवार सुबह से ही आसपास के लोगों और रिश्ते-नातेदारों का शहीद के घर संवेदना जताने के लिए तांता लगा रहा। सूचना थी कि दोपहर तक शव जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर पहुंच जाएगा और इसी के मद्देनजर गुरुंग परिवार ने महेश के अंतिम संस्कार की पूरी तैयारी कर ली थी। दाह-संस्कार हरिद्वार में करने की तैयारी थी और जाने के लिए बस भी मंगा ली गई थी। लेकिन इंफाल से शव दिल्ली पहुंचने में देर हो गई। शाम लगभग साढ़े पांच बजे शहीद का शव जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचा। बड़ी संख्या में परिजन व ग्रामीण एयरपोर्ट पहुंचे हुए थे।  


गुरुंग परिवार में इन दिनों खुशियों का माहौल था। शहीद महेश की पत्नी सीमा आठ माह की गर्भवती थी और अगले माह घर में खुशियां आने वाली थीं लेकिन सब मातम में बदल गया। पति की मृत्यु के बारे में पता लगते ही सोमवार देर रात सीमा की तबियत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। देर रात आपरेशन से सीमा ने बेटी को जन्म दिया। समय से पूर्व जन्म के चलते नवजात बेटी को मशीन में रखा गया है। हालांकि, सीमा मंगलवार को अस्पताल से जबरन घर आ गई, ताकि पति के अंतिम दर्शन कर सके। 

28 दिन पहले गए थे महेश

महेश मार्च में होली की छुट्टियों में घर आए थे। परिवार के साथ हंसी-खुशी एक माह बिताकर वह 25 अप्रैल को ही ड्यूटी पर लौटे थे। कहकर गए थे कि अब जून में हमेशा के लिए घर लौट आऊंगा, मगर नियति इतनी क्रूर होगी, किसे पता था। बेटा आयुष तो बार-बार पापा कब आएंगे, पापा कब आएंगे बोल रहा है। वहीं, प्रसव पीड़ा से गुजर चुकी सीमा बेसुध पड़ी है।



जून में लेनी थी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति
महेश गुरुंग अगले माह जून में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले थे। महेश के सबसे बड़े भाई गप्पू गुरुंग ने बताया कि महेश ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन कर रखा था। अप्रैल में देहरादून से लौटते हुए महेश दीनापुर (असम) में बटालियन के मुख्यालय होकर गए थे। उनके पेंशन आदि के कागज भी तैयार हो चुके थे। 
नहीं दिखे वोट मांगने वाले नेता 

चुनाव के दौरान दूरस्थ गांव दौड़वाला में वोट के लिए दर-दर हाथ जोड़े खड़े रहने वाले नेताओं में से एक भी शहीद गुरुंग के घर शोक-संवेदना जताने नहीं पहुंचा। राज्य सरकार का कोई नुमाइंदा, क्षेत्रीय विधायक समेत कोई जनप्रतिनिधि नहीं आया। 


संवेदनहीन पुलिस-प्रशासन
शहीद के संबंध में पुलिस-प्रशासन को मंगलवार सुबह ही आधिकारिक सूचना आ गई थी लेकिन दोनों निरंकुश रहे। प्रशासन व पुलिस का कोई अधिकारी शहीद के घर नहीं पहुंचा। खानापूर्ति के लिए दो सिपाही जरूर आए थे, लेकिन पांच मिनट रुककर वे भी लौट गए। शहीद के परिवार को यह सूचना सोमवार दोपहर मिल गई थी। 


मुख्यमंत्री व सांसद ने जताया शोक

असम में नक्सली हमले में शहीद हवलदार महेश गुरुंग की शहादत पर मुख्यमंत्री हरीश रावत और हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने शोक जताया है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि वह शहीद के परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे। 

एक बयान में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शहीद के परिवार को हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए वचनबद्ध है। वहीं, सांसद निशंक के प्रतिनिधि महेश पांडे ने बताया कि शहीद का शव आने की सूचना पर निशंक मंगलवार सुबह ही डोईवाला पहुंच गए थे, लेकिन दोपहर तक शव नहीं आया। निशंक बुधवार की सुबह शहीद की अंतिम यात्रा में शामिल होंगे।जागरण 



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