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पिथोरागढ़  न्यूज़   : 12 जुलाई , 2016

पिथौरागढ़ में एक बार फिर बादल फटा। इसकी चपेट में 400 से ज्यादा मवेशी आए हैं। हैरत इस बात की है कि घटना 10 जुलाई रात की है और इस प्राकृतिक आपदा की खबर प्रशासन को कल शाम पता लगी।


उत्तराखंड में अलग-अलग स्थानों पर पड़ रही जोरदार बौछारें आफत का सबब बनी हुई हैं। खासकर दूरस्थ इलाकों में लोगों को ज्यादा दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। इस बीच 10 जुलाई की रात पिथौरागढ़ के मल्ला जोहार क्षेत्र में बादल फटने से पांछू ग्वार में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ। 400 से अधिक मवेशी मलबे में दफन हो गए। गांव को जोडऩे वाला पुल भी बह गया। आज आपदा प्रबंधन का दल मौके के लिए रवाना कर दिया गया है।


उधर, सूबे में 97 सड़कें बाधित हैं, जिनमें से 85 ग्रामीण क्षेत्रों की हैं। ऐसे में ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, बदरीनाथ राजमार्ग करीब आठ घंटे बाधित रहा।


उच्च हिमालयी क्षेत्र में करीब 12 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित पांछू क्षेत्र में बीती रात बादल फटने से हुए नुकसान की जानकारी प्रशासन को आज शाम मिल पाई। पांछू ग्वार बुग्याल में बकरी चरा रहे चरवाहे कल शाम पांच बजे बमुश्किल मापा गांव पहुंच सके। तब जाकर शाम करीब छह बजे इसकी सूचना मुनस्यारी कंट्रोल रूम को दी गई। बताया गया कि इस क्षेत्र में मध्य रात्रि में बादल फटा।

इसके चलते हुए भूस्खलन के मलबे में 400 से अधिक भेड़-बकरियां दब गए। यही नहीं, ग्वार से पांछू गांव जोडऩे वाला पुल पांछू नदी के उफान में बह गया। एसडीएम कौस्तुभ मिश्रा ने बताया कि पांछू ग्वार के लिए 10 सदस्यीय दल रवाना कर दिया गया है।

बता दें कि पांछू ग्वार मुनस्यारी से 56 किमी की पैदल दूरी पर स्थित है। दल के 13 या 14 जुलाई को वहां पहुंचने की संभावना है। वहीं संचार सेवा ठप होने से मुनस्यारी तहसील का 12 घंटे से संचार संपर्क कटा है। थल-मुनस्यारी मार्ग पर नाचनी के पास सड़क दरकने से इसे यातायात के लिए बंद कर दिया गया है। यही नहीं, कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग खेत के पास दूसरे दिन भी बंद रहा। 

इधर, सूबे के अन्य क्षेत्रों खासकर ग्रामीण इलाकों में सड़कें बाधित होने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। चारधाम यात्रा पर भी असर पड़ा है। बदरीनाथ राजमार्ग कल करीब आठ घंटे बाद खुल पाया। हालांकि, यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों से रवाना कर दिया गया था। जागरण 



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