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उत्तराखंड तथ्य   : 12 जुलाई , 2016

उत्तराखंड के मांणा गांव में महाभारत काल की सबसे बड़ा गवाह मौजूद है। यहां महाभारत ग्रंथ के रचयिता मुनि व्यास का निवास स्‍थान है। इस जगह को व्यास पोथी के नाम से जाना जाता है।  पौराणिक मान्यताओं के अनुसार व्यास जी ने गणेश जी को अपनी बातों में उलझा दिया और गणेश जी को पूरी महाभारत कथा मांणा गांव में ‌स्थित व्यास गुफा में बैठकर लिखनी पड़ी थी। जहां यह कथा लिखी गई थी वह गुफा अलकनंदा और सरस्वती नदी के संगम तट पर मौजूद है। यह पवित्र स्थान देवभूमि उत्तराखंड में बद्रीनाथ धाम से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर भारतीय सीमा के अंतिम गांव माणा में स्थित है। कहा जाता है कि इसी गुफा में रहकर वेदव्यास जी ने सभी पुराणों की रचना की थी। व्यास गुफा को बाहर से देखकर ऐसा लगता है मानो कई ग्रंथ एक दूसरे के ऊपर रखे हुए हैं। इसलिए इसे व्यास पोथी भी कहते हैं। बद्रीनाथ के दर्शनों के बाद जो यात्री गणेश गुफा और व्यास गुफा की यात्रा करना चाहते हैं वह तीन किलोमीटर की पैदल यात्रा भी कर सकते हैं। रास्ते में साथ चलते अलकनंदा नदी को देखना मन को आनंदित करता है। जो यात्री पैदल नहीं चलना चाहते हैं वह बद्रीनाथ से माणा गांव तक के लिए सवारी ले सकते हैं। यहां कार और जीप की सुविधा हमेशा उपलब्ध रहती है।अमर उजाला 



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