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उत्तराखंड   : 08 जुलाई , 2016

ऊं पर्वत को खोजने का श्रेय टीआरसी प्रबंधक विपिन पांडे को जाता है। इसके खोज की की कहानी बड़ी ही रोचक है।

उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित ऊं पर्वत की खोज बढ़े ही रोचक  तरीके से हुई। इसे जानकर चौंक जाएंगे आप। आइये जानते हैा ऊं पर्वत के बारे में।

मानसरोवर यात्रा से लौट रहा यात्रियों का दूसरे दल बीते रोज जब भीमताल टीआरसी में रुका तो जय जानकार उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। खुशी का कारण था कि 1981 में ऊं पर्वत को खोजने वाले विपिन पांडे उनके सामने खड़े थे। इस दौरान निगम कर्मचारियों ने यात्रियों को बताया कि ऊं पर्वत को खोजने का श्रेय टीआरसी प्रबंधक विपिन पांडे को जाता है। इसकी जानकारी होते ही सभी यात्री उनके साथ अनुभव साझा करने में जुट गए। इस दौरान कुमाऊं मंडल विकास निगम कर्मचारियों ने इस संबंध में अखबारों में छपी खबरों को यात्रियों को दिखाया।


दरअसल खोज का प्रकरण 1981 का है जब विपिन पांडे 24 वर्ष के थे और यात्रा के दौरान यात्रियों के साथ मानसरोवर यात्रा पर जा रहे थे। पांडे बताते हैं कि सुबह नाबीढांग में जब वह अपने टैंट में थे तब चारों और बादल दिखाई दे रहे थे, लेकिन ऊं पर्वत की आकृति वाले पर्वत पर कोई बादल नहीं था। सूर्य की पहली किरण ने जब चोटी पर पड़ी तो धीरे-धीरे यह पर्वत ऊं शब्द की स्वर्णिम आभा से चमकने लगा। वह काफी देर तक पर्वत चोटी को देखते रहे। हिंदू धर्म में ऊं को शुभ माना जाता है।


पांडे बताते हैं कि इस पर्वत को इसके नाम से खोजने में उन्हें शोध कार्य में भी बहुत कठिन परिश्रम करना पड़ा। तब निश्चिंत हुए जब उन्होंने विश्व मानचित्र में ऊं पर्वत को दर्ज करा लिया। पांडे बताते हैं कि हिमालय पर्वत श्रृंखला में अभी भी कई चोटियां ऐसी हैं जो देवी-देवताओं का रूप धारण किए हैं। जागरण 



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