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देहरादून न्यूज़ : 16 जुलाई , 2016

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में हर बारिश के साथ होने वाले भूस्खलन के बाद सड़कें बन जाती हैं। पर ये काम इतना आसान नहीं है। यहां हर पल सिर पर मौत होती है। सड़क के ऊपर आए मलबे को हटाते वक्त ऊपर से चट्टान गिरती रहती है। सड़क बनाते वक्त चट्टान से पत्थर छिटककर गिरने से कई हादसे हो चुके हैं जिनमें जान तक चली गई है। कई बार तो मलबे के साथ पूरी की पूरी सड़क ही साफ हो जाती है। फिर पूरा नया रास्ता बनाने की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ती है। इस दौरान खड़ी चट्टान को काटकर आगे का रास्ता बनाया जाता है। इस काम में बीआरओ और लोनिवि की मशीनों के साथ  मजदूरों से भी काम लिया जाता है। बारिश और भूस्खलन के चलते ये चट्टानें कमजोर होती हैं और कभी भी यहां हादसों की आशंका रहती है। वहीं सड़क बहने के बाद लोग चट्टान की खौफनाक पगडंडियों से आवाजाही करने को मजबूर होते हैं। जिन रास्तों पर खाली चलना भी खतरे से खाली नहीं उन्हीं रास्तों पर भारी-भरकम सामान लादकर लोग चल रहे हैं। अगर जरा भी कदम फिसला तो नीचे खाई में मौत इंतजार करती नजर आती है। अमर उजाला



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