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देहरादून: 23 अगस्त , 2016


देवभूमि स्थित माता भगवती महाकालिका का यह दरबार अनगिनत, असंख्य अलौकिक दिव्य चमत्कारों से भरा पड़ा है।  पिथौरागढ़ के गंगोलहाट में स्थित लोगों की आस्था का केंद्र महाकाली मंदिर अनेक रहस्यमयी कथाओं को अपने आप में समेटे हुये है।  कहा जाता है कि जो भी भक्तजन श्रद्वापूर्वक महाकाली के चरणों में आराधना के पुष्प अर्पित करता है उसके रोग, शोक, दरिद्रता एवं महान विपदाएं दूर हो जाती है। स्‍थानीय लोग बताते हैं यहां श्रद्वा एवं विनयता से की गयी पूजा का विशेष महत्व हैं। इसलिये वर्ष भर यहां बडी संख्या में श्रद्वालु पहुंचते हैं। महाकाली के संदर्भ में एक प्रसिद्व किवदन्ति है कि कालिका का जब रात में डोला चलता है तो इस डोले के साथ कालिका के गण, आंण व बांण की सेना भी चलती हैं। कहते हैं यदि कोई व्यक्ति इस डोले को छू ले तो दिव्य वरदान प्राप्त होता है। इसके साथ ही यह भी कहा जाता है कि महाआरती के बाद मंदिर में शक्ति के पास महाकाली का बिस्तर लगाया जाता है और प्रातः काल बिस्तर पर सिलवटे दिखाई देती हैं। जिसे देखकर यह माना जाता है कि कालिका विश्राम करके गयी हों। मां काली के प्रति उनके तमाम किस्से आज भी क्षेत्र में सुने जाते है भगवती महाकाली का यह दरबार असंख्य चमत्कार व किवदन्तियों से भरा पडा है।अमर उजाला


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