.

.



देहरादून : 17 अगस्त , 2016


छत्तीसगढ़ में एक नक्सली हमले को विफल बनाने पर सीमा सुरक्षा बल के सहायक कमांडेंट विवेक रावत को राष्ट्रपति पुलिस पदक प्रदान किया जाएगा।

देहरादून के जीएमएस रोड स्थित शाम्भवी लोक निवासी विवेक ने कई साथियों के शहीद होने और खुद गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अदम्य साहस का परिचय देते हुए मोर्चा संभाले रखा। राष्ट्रपति स्वतंत्रता दिवस पर उन्हें सम्मानित करेंगे।

बीएसएफ की 122 वीं बटालियन में तैनात सहायक कमांडेंट विवेक रावत फरवरी 2015 को छत्तीसगढ़ में तैनात थे। दो फरवरी को नक्सल प्रभावित कांकेर जिले के बांदे थाने में नक्सलियों के एक समूह के बड़ी वारदात अंजाम देने की सूचना बीएसएफ को मिली।

बीएसएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने नक्सलियों की घेराबंदी के लिए योजना बनाई। बारूदी सुरंगों के चलते दस सदस्यीय सर्च टीम मोटरसाइकिलों पर रवाना हुई, इसकी भनक नक्सलियों को पहले से लग चुकी थी।

जैसे ही सर्च टीम पहुंची उन्होंने वहां गांव के बच्चों की आड़ लेकर सुरक्षा बलों पर हमला कर दिया। जोरदार हमले में थाना प्रभारी अविनाश शर्मा, सहायक आरक्षक सोनू गावडे शहीद हो गए।

असिस्टेंट कमांडेंट विवेक रावत की जांघ पर गोली लगने से उनकी हड्डी टूट गई, जबकि एक जवान बुरी तरह से घायल हो गया। विवेक रावत ने गंभीर चोट के बावजूद टीम की कमान संभाली।

लगभग दो घंटे तक मोर्चा संभाले रखने के बाद बीएसएफ की दूसरी टीम पहुंची तो नक्सलियों को खदेड़ा गया। विवेक के पिता आनंद सिंह रावत ने बताया कि बेटे को राष्ट्रपति पुलिस पदक का सम्मान उनके परिवार के लिए गौरव की बात है। अमर उजाला


See More

 
Top