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देहरादून : 8 सितम्बर , 2016 

त्यूनी। कुनोली-दारागाड़ के समीप हुए हादसे ने एक बार फिर आपदा प्रबंधन की पोल खोल कर रख दी। स्थानीय लोगों को ही राहत एवं बचाव कार्य में जुटना पड़ा। स्थिति यह हो गई कि खाई से शवों को निकालने के लिए दुर्घटनाग्रस्त हुई बस की सीटों को ही स्ट्रेचर बनाकर, उस पर शव लादे गए और सड़क तक पहुंचाया गया। 

एंबुलेंस नहीं मिली, हंगामा काटा 
घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 एंबुलेंस तक मुहैया नहीं हो सकी। एंबुलेंस के इंतजार में घायल काफी देर तक सड़क किनारे ही दर्द से कराहते रहे। जब काफी इंतजार के बाद भी एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची तो लोगों ने निजी वाहनों से घायलों को अस्पताल पहुंचाया। प्रशासन की इस बेरुखी पर लोगों ने नाराजगी जताई। उन्होंने घटनास्थल पर हंगामा काटा। 

राहत व बचाव को नहीं है जरूरी संसाधन
स्थानीय निवासी प्रदीप कुमार, धन सिंह, जय सिंह, रतन सिंह ने कहा कि दुर्गम क्षेत्र होने के बावजूद यहां आपदा प्रबंधन की टीम तैनात नहीं है। राजस्व पुलिस के पास भी राहत एवं बचाव कार्य के लिए जरूरी संसाधन तक नहीं हैं। हर बार स्थानीय लोग अपने स्तर से ही राहत और बचाव कार्य करते हैं। समय पर उपचार न मिलने पर अक्सर दुर्घटना में मरने वालों की संख्या बढ़ जाती है।  अमर उजाला



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