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गढ़वाल कुमाऊं का जनमानस तो अच्छे से जानता होगा कि उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल के फेगुलीपट्टी के थात गॉव की सीमा पर अवस्थित 10000 फिट उंचाई की पर्वत श्रृंखला खैट पर्वत में परियों का वास है क्योंकि बागड़ी गॉवके जीतू बगडवाल व साली भरूणा का प्रेम प्रसंग, जीतू की बांसुरी व परियों द्वारा दिन दहाड़े खेतों में धान की रोपाई करते हुए हल बैल सहित जीतू बगड्वाल के हरण की गाथा अभी ज्यादा पुरानी नहीं हुई है. 
 

थात गॉव से 5किमी दूरी पर स्थित खैट खाल मंदिर है रहस्यमयी शक्तियों का केंद्र. 
1- खैट पर्वत की नौ श्रृंखलाओं में है नौ देवियों (आंछरियों/परियों) का निवास स्थल, जिसे भराड़ी देवी भी कहा जाता है.
2- यहाँ दिखेंगी आपको दीवारों ऊँची चट्टानों पर उल्टी ओखल, 
3- यहाँ मिलेगी लहसुन की खेती. 
4- अखरोट के बागान (पीड़ी पर्वत)
5- लुकी पीड़ी पर्वत पर माँ बराडी का मंदिर
6- गर्भ जोन गुफा जिसका आदि न अंत.
7- चौखुडू चौन्तुरु (जहाँ आंछरियाँ नृत्य कला का प्रदर्शन करती हैं व खेल खेलती हैं.
8- भूलभुलैय्या गुफा जहाँ नाग आकृतियाँ उकेरी हुई हैं.
9- नैर-थुनैर नामक दो वृक्ष जिसके पत्तों से महकती है अजीबोगरीब खुशबु.
कहीं ये वही ऐडि-आंछरी/ योगिनियाँ/रणपिचासनियाँ तो नहीं जो जिन्होंने अंधकासुर दैन्त्य बिनाश में महादेव कैलाशपति का साथ दिया था और कुछ कैलाश जाने की जगह यहीं छूट गयी थी.
कहीं ये वही कृत्या सुकेश्वरी नामक योग्निया/परियां तो नहीं जिन्होंने दैन्त्यों के रक्त से अपनी भूख मिटाई थी.
रहस्य और रोमांच से भरी इस यात्रा में आखिर मेरे शोध के साथ कौन कौन मित्र होणा चाहता है शामिल...?
लेकिन ध्यान रहे इन बुग्यालों में चिल्लाना, चटक कपडे पहनना, बेवजह वाद यंत्र बजाना, प्रकृति विपरीत कार्य करना पूर्णत: प्रतिबंधित है. इसलिए वही चले जो तीन दिन तक नियम संयम व बिना शराब कबाब शबाब के रह सके. (मनोज इष्टवाल)


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