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देहरादून : 8 सितम्बर , 2016



भागीरथी इको सेंसिटिव जोन के मामले में उत्तराखंड शासन ने केंद्र सरकार से साफ कह दिया है कि जोन की बंदिशें लागू होने से देश की चीन सीमा असुरक्षित हो जाएगी।


यहां ‘भूतिया’ कहे जाने वाले ऐसे गांवों की संख्या बढ़ रही है जिनमें अब कोई नहीं है। सबसे गंभीर बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इन गांवों में अब स्थायी पलायन हो रहा है। पहले अस्थायी पलायन होता था, लोग बर्फबारी के मौसम में दूसरे स्थानों पर जाकर लौट आते थे।

केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एडीशनल सेक्रेटरी अमिता प्रसाद की अध्यक्षता में गठित एक्सपर्ट कमेटी के समक्ष भागीरथी इको सेंसिटिव जोनल प्लान के प्रस्तुतीकरण के वक्त प्रदेश शासन की टीम ने अपना पक्ष रखा। अपर मुख्य सचिव एस. रामास्वामी की अगुवाई में टीम गई थी।

एक्सपर्ट कमेटी से यह भी कहा कि उत्तराखंड के इको सेंसिटिव जोन में दो मेगावाट के प्रोजेक्ट केंद्र ने अनुमन्य किए हैं, जबकि हिमाचल में 25 मेगावाट तक के प्रोजेक्ट लगाने की छूट दी गई है। हिमाचल और उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति और जैव विविधता एक जैसी है।  अमर उजाला


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