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नैनीताल   न्यूज़ : 1 अक्टूबर  , 2016


मंगलवार को हाईकोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण न करने वाले शिक्षक मित्रों को जोर का झटका दिया है। हाईकोर्ट ने शिक्षा मित्रों की नियुक्ति प्रारंभिक शिक्षक के रूप में करने के मामले पर सुनवाई के बाद टीईटी न करने वाले  उन शिक्षा मित्रों को हटाने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकल पीठ में ऊधमसिंह नगर निवासी ललित व अन्य की याचिका में कहा गया था कि सरकार  ने  शिक्षा  मित्रों को बिना शिक्षक पात्रता परीक्षा के शामिल किया है, जो कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम की धारा 23  (2) का उल्लंघन है। शिक्षा के अधिकार अधिनियम की धारा 23 के अनुसार अध्यापक की नियुक्ति में यदि कोई छूट प्रदान  की जाती है तो वह केवल भारत सरकार गजट अधिसूचना के जरिए कर सकती है। भारत सरकार की ओर से अध्यापक पात्रता में कोई छूट नहीं दी गई  है। पात्रता की छूट एनसीटीई के 17 फरवरी 2014 के पत्र के अनुसार दी  गई है। यह भी गलत है। छूट देने का प्रावधान अधिनियम में केवल भारत   सरकार को है। एनसीटीई को केवल शैक्षिक  अर्हता लागू करने का अधिकार है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने  इलाहाबाद  हाईकोर्ट की ओर से पारित शिक्षा मित्रों के निर्णय का भी हवाला दिया। कहा गया कि इसमें शिक्षा मित्रों की नियुक्ति प्रारंभिक शिक्षक के रूप में  करना अवैध ठहराया गया है। सरकार ने राज्य में लगभग 3652 शिक्षा मित्रों की नियुक्ति सहायक अध्यापक पद पर की है, हालांकि इसमें कुछ शिक्षक टीईटी पास भी है। पक्षों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि अध्यापक बनने के लिए टीईटी अनिवार्य है। कोर्ट ने दी गई छूट को अवैधानिक करार देते हुए सरकार द्वारा नियमावली में किए गए परिवर्तन को निरस्त करने का आदेश दिया। कोर्ट ने बगैर टीईटी पास शिक्षा मित्रों को सेवा से हटाने व पात्र शिक्षकों को उनके स्थान पर नियुक्त करने के निर्देश दिए। अमर उजाला


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