देहरादून: उत्तराखण्ड को यूं तो देवभूमि के नाम से दुनिया भर में जाना जाता है, इस सुरम्य प्रदेश की एक और खासियत यह है कि यहाँ के त्यौहार किसी न किसी रुप में प्रकृति से जुड़े होते हैं। प्रकृति ने जो उपहार हमे दिया है, उसके प्रति आभार अपने लोक त्यौहारों में उन्हें समाहित कर चुकाने का प्रयास करते हैं। इसी क्रम में आज चैत्र मास की संक्रान्ति को फूलदेई के रुप में प्रदेशभर में मनाया जा रहा है, जो बसन्त ऋतु के स्वागत का त्यौहार है।

वहीं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में पर्वतीय संस्कृति की त्रिवेणी फूलदेई त्यौहार बच्चों के साथ मनाया। मुख्यमंत्री ने प्रकृति के इस त्यौहार की बच्चों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह पर्व उत्तराखण्ड की संस्कृति को उजागर करता है। फूलदेई उत्तराखण्ड की प्राचीन परम्परा है। नव वर्ष के आगमन पर बच्चे घरों में जाकर पुष्पदान करते है और बड़ों का आशीर्वाद लेते है। साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें अपनी प्राचीन संस्कृति को संजोकर रखने की जरूरत है। प्रकृति के इस त्यौहार को संजोए रखने के लिये सबको मिलकर प्रयास करने होंगे। फूलदेई का त्यौहार सुख शांति की कामना का प्रतीक है। उन्होंने प्रदेशवासियों को फूलदेई त्यौहार की शुभकानाएं एवं बधाई दी हैै। इसके साथ ही राजभवन में राजयपाल ने भी बच्चों के साथ फूलदेई का त्यौहार मनाया। राजयपाल के के पॉल ने इस अवसर पर बच्चों को उपहार भी भेट किये।

आपको बता दें कि इस त्यौहार को लेकर बच्चों में बड़ा उत्साह देखा जाता है, पहाड़ी क्षेत्रों वे सुबह ही उठकर जंगलों की ओर चले जाते हैं और वहां से फ्यूंली, बुरांस आदि जंगली फूलो के अलावा आडू, खुबानी, पुलम जैसे फलदार पेड़ों से भी फूलों को चुनकर लाते हैं और रिंगाल की टोकरी में चावल, हरे पत्ते, और इन फूलों को सजाकर हर घर की देहरी पर लोकगीतों को गाते हुये जाते हैं।

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